महोबा में पिकनिक मनाने परिवार के साथ गए दो सगे भाइयों की धसान नदी में डूबने से मौत हो गई. दरअसल, नहाते समय जितेंद्र और उनका 5 साल का बेटा नदी में डूबने लगा. जितेंद्र ने बेटे को तो किसी तरह किनारे की ओर उछाल दिया, लेकिन खुद पानी में डूबने लगे.
बड़े भाई जितेंद्र को डूबता देख छोटा भाई विपिन भी उन्हें बचाने के लिए नदी में कूद गया, लेकिन दोनों ही बाहर नहीं निकल सके। आसपास मौजूद गोताखोरों ने तत्परता दिखाते हुए दोनों को पानी से बाहर निकाला, मगर उनकी जान नहीं बच सकी.

परिजनों का आरोप है कि एंबुलेंस करीब 2 घंटे की देरी से पहुंची. उनका कहना है कि दोनों भाइयों की सांसें करीब डेढ़ घंटे तक चल रही थीं. समय पर चिकित्सा सहायता मिल जाती तो उनकी जान बच सकती थी.
रविवार देर शाम हुई यह घटना महोबा और झांसी जिले की सीमा पर स्थित धसान नदी की है. मृतकों की पहचान बिजौली गांव निवासी सरकारी शिक्षक जितेंद्र (32) और पुलिस भर्ती की तैयारी कर रहे उनके भाई विपिन (24) के रूप में हुई है.
फतेहपुर के बिजौली गांव निवासी विजय बहादुर के बेटे जितेंद्र (32) महोबा के पनवाड़ी स्थित नेपुरा विद्यालय में सरकारी शिक्षक थे. वह पनवाड़ी कस्बे में किराए के मकान में पत्नी और बेटे के साथ रहते थे. उनके दो छोटे भाई विपिन (24) और रंजीत (27) महोबा में पुलिस भर्ती परीक्षा देने आए थे. वहीं, जितेंद्र का साला दिलीप भी झांसी में होने वाली परीक्षा में शामिल होने पहुंचा था.
रविवार शाम करीब 5 बजे जितेंद्र अपनी पत्नी शालू, 5 वर्षीय बेटे सिद्धांत, साले दिलीप और दोनों भाइयों के साथ झारखंड धाम स्थित धसान नदी के तट पर घूमने पहुंचे. यहां वह अपने बेटे और भाई रंजीत के साथ नदी में नहाने उतर गए.
नहाते समय जितेंद्र और उनका 5 वर्षीय बेटा अचानक गहरे पानी में चले गए, जिससे दोनों डूबने लगे। इस दौरान जितेंद्र ने सूझबूझ दिखाते हुए बेटे को हवा में उछालकर किनारे की ओर फेंक दिया. बेटे को भाई रंजीत ने सुरक्षित पकड़ लिया.
उधर, जितेंद्र को डूबता देख किनारे बैठा छोटा भाई विपिन उन्हें बचाने के लिए नदी में कूद गया. हालांकि, बड़े भाई को बचाने की कोशिश में वह खुद भी गहरे पानी में फंस गया. इसके बाद उनका साला दिलीप भी नदी में उतर गया.
जितेंद्र की पत्नी शालू ने शोर मचाया तो आसपास के ग्रामीण मौके पर जुट गए. इस बीच जितेंद्र और विपिन गहरे पानी में समाते चले गए। सूचना मिलते ही गांव के कुछ गोताखोर मछुआरे नदी में उतरे और थोड़ी देर की मशक्कत के बाद दोनों को अचेत अवस्था में बाहर निकाल लाए.
सीमा विवाद में उलझी रही 108 एंबुलेंस: दोनों भाइयों को नदी से बाहर निकालने के बाद लोगों ने तुरंत 108 एंबुलेंस को सूचना दी। परिजनों का आरोप है कि घटना स्थल महोबा और झांसी जिले की सीमा पर होने के कारण एंबुलेंस सीमा विवाद में उलझी रही. उनका कहना है कि 108 पर की गई कॉल बार-बार झांसी कंट्रोल रूम में ट्रांसफर हो रही थी.
परिजनों के मुताबिक, काफी देर तक एंबुलेंस मौके पर नहीं पहुंची. बाद में पनवाड़ी से एंबुलेंस बुलाई गई. अस्पताल पहुंचने पर सरकारी डॉक्टरों ने दोनों भाइयों को मृत घोषित कर दिया.
खाकी पहनने का सपना धसान नदी में डूबा: छोटा भाई विपिन उर्फ राजा सोमवार को होने वाली पुलिस आरक्षी भर्ती परीक्षा देने महोबा आया था. परिवार को उम्मीद थी कि वह खाकी वर्दी पहनकर घर और गांव का नाम रोशन करेगा, लेकिन परीक्षा से ठीक एक दिन पहले हुई इस घटना ने परिवार की सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया.
दो सगे भाइयों की एक साथ मौत से परिवार में कोहराम मचा हुआ है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है.
दो भाइयों को अपनी आंखों के सामने डूबते देखा: रंजीत ने बताया, “हम अपने छोटे भाई विपिन की पुलिस भर्ती परीक्षा दिलाने महोबा आए थे. जितेंद्र भईया ने कहा था कि चलो, तुम्हें थोड़ा घुमा लाते हैं. इसी दौरान हम लोग धसान नदी पहुंचे। नदी में एक ढलाननुमा जगह थी, जहां हम नहाने उतर गए.
नहाते समय मेरे बड़े भाई जितेंद्र और उनका बेटा अचानक गहरे पानी में चले गए और डूबने लगे। मेरा छोटा भाई विपिन उस समय किनारे पर बैठा था, वह नहा भी नहीं रहा था। जैसे ही उसने बड़े भाई को डूबते देखा, वह उन्हें बचाने के लिए नदी में कूद गया। मैं तो किसी तरह बाहर निकल आया, लेकिन दोनों भाई डूब गए.”
एंबुलेंस लगभग 3 घंटे बाद आई: रंजीत ने बताया कि गांव के गोताखोरों ने कुछ ही देर में दोनों को नदी से बाहर निकाल लिया था. इसके बाद उन्होंने एंबुलेंस और पुलिस को सूचना दी. उनका आरोप है कि पुलिस और एंबुलेंस लगातार 10 मिनट में पहुंचने की बात कहती रही, लेकिन काफी देर तक कोई नहीं पहुंचा. पुलिस करीब 45 मिनट बाद मौके पर पहुंची, जबकि एंबुलेंस लगभग 3 घंटे बाद आई. इस दौरान एंबुलेंस कर्मी फोन पर बार-बार रास्ता पूछते रहे.
डेढ़ घंटे तक चलती रहीं सांसें: रंजीत ने बताया, “मेरे बड़े भाई और छोटे भाई की सांसें करीब डेढ़ घंटे तक चल रही थीं. मैं बार-बार उनकी सांसें जांच रहा था और उनके बचने की उम्मीद लगाए बैठा था, लेकिन एंबुलेंस समय पर नहीं पहुंची. अगर समय पर इलाज मिल जाता तो शायद उनकी जान बच सकती थी.”
रंजीत का आरोप है कि एंबुलेंस की देरी के कारण दोनों भाइयों को समय पर उपचार नहीं मिल सका और उनकी मौत हो गई.

पत्नी बोलीं- दोनों की सांसें चल रही थीं: जितेंद्र की पत्नी शालू देवी ने बताया, “मेरे पति सरकारी शिक्षक थे। हादसे के बाद मल्लाहों ने दोनों को नदी से बाहर निकाल लिया था. उस समय दोनों की सांसें चल रही थीं, लेकिन एंबुलेंस मौके पर नहीं पहुंची. अगर समय पर चिकित्सा सहायता मिल जाती तो शायद उनकी जान बचाई जा सकती थी.”
योगी जी से न्याय की गुहार लगाई: जितेंद्र की पत्नी शालू देवी ने आरोप लगाया, “हादसे के बाद अधिकारियों ने हमारे साथ अभद्र व्यवहार किया. जब हमने कहा कि हम दोनों को किसी निजी अस्पताल में दिखाना चाहते हैं, तो उन्होंने हमारी बात सुनने के बजाय हमें ही धमकाना शुरू कर दिया. कहा कि ज्यादा बोलोगे तो तुम्हारे खिलाफ मुकदमा दर्ज कर देंगे.
हमने उनसे कहा कि हमारे ऊपर गाड़ी ही चढ़ा दो. यहां पहले से दो लाशें पड़ी हैं, दो और पड़ जाएंगी तो कोई फर्क नहीं पड़ेगा. हम उनके आगे हाथ-पैर जोड़ते रहे, लेकिन उन्होंने हमें झटककर अलग कर दिया.”
शालू देवी ने सीएम योगी से न्याय की गुहार लगाते हुए कहा, “मैं मुख्यमंत्री योगी जी से सिर्फ इतना कहना चाहती हूं कि हमारे परिवार को न्याय दिलाया जाए.”
तहरीर मिलने पर कार्रवाई होगी-सीओ: सीओ रविकांत गौड़ ने कहा- “दो सगे भाइयों की डूबकर मौत हुई है. दोनों के शव पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिए गए हैं. परिजनों के आरोपों की जांच होगी। तहरीर के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.”
















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