कानपुर में हाईस्कूल के एक छात्र के पेट में घुसी 7 फीट की लाठी को ऑपरेशन करके निकाला गया. डॉक्टरों की टीम ने सर्जरी के दौरान पहले ग्राइंडर से लाठी के टुकड़े किए. उसके बाद करीब साढ़े चार घंटे चले ऑपरेशन के दौरान लाठी को 1-1 इंच करके बाहर निकाला.
कन्नाैज का रहने वाला छात्र गिल्ली-डंडा खेलते समय कॉलेज की बाउंड्री से गिर गया था. वहीं नीचे एक लाठी खड़ी करके रखी हुई थी, जो छात्र के पेट के आर-पार हो गई. घटना 31 जुलाई की है। ऑपरेशन के बाद 19 अगस्त को छात्र को डिस्चार्ज किया गया.
ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर बृजेश यादव ने बताया-“मरीज के शरीर से बाहर दिख रहे लाठी के हिस्से को ग्राइंडर से काटा। इसके बाद लाठी को 1-1 इंच करके धीरे-धीरे बाहर निकाला गया. लाठी जैसे-जैसे बाहर निकलती गई, अंदर डैमेज हुए अंगों को साथ के साथ रिपेयर किया जाता रहा.”

गिल्ली-डंडा खेलते वक्त हुआ हादसा: कन्नौज के तालग्राम के निकवां गांव के रहने वाले शिवपाल यादव ट्रक ड्राइवर हैं. परिवार में पत्नी विनीता यादव और तीन बच्चे हैं। उनमें सबसे बड़ा विशाल (19), उसके बाद आकाश (12) और सबसे छोटी बेटी अनामिका (6) है। विशाल हाईस्कूल का छात्र है.
चचेरे भाई अनिकेत यादव ने बताया 31 जुलाई की शाम 5:00 बजे विशाल गांव के लड़कों के साथ गिल्ली-डंडा खेल रहा था. खेलते-खेलते वह एक कॉलेज की 5 फीट ऊंची बाउंड्री पर चढ़ गया. इसी बीच उसका बैलेंस बिगड़ गया। वह बाउंड्री से गिर गया. इस दौरान एक लाठी उसके पेट में घुस गई. लाठी का करीब 3 फीट हिस्सा पेट में घुस गया.
हैलट में इलाज में देरी, प्राइवेट अस्पताल ले गए: अनिकेत ने बताया कि हैलट में विशाल के इलाज में देरी हो रही थी. रात में ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों ने इलाज से मना कर दिया. इसके बाद 31 जुलाई की ही रात वह करीब 11:00 बजे कल्याणपुर स्थित एक प्राइवेट अस्पताल में पहुंचे.
वहां पर सीनियर सर्जन डॉ.बृजेश यादव ने विशाल का ऑपरेशन किया गया. पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद बुधवार 19 अगस्त को विशाल को अस्पताल से डिस्चार्ज किया गया है. उसकी हालत में सुधार है.
अनिकेत के मुताबिक, गांव के लोगों की सूचना पर वह तुरंत विशाल को सरकारी तालग्राम अस्पताल लेकर पहुंचे. वहां डॉक्टरों ने इलाज से मना कर दिया. इसके बाद वह मेडिकल कॉलेज तिर्वा ले गए. वहां से कानपुर के हैलेट रेफर किया गया.
साढ़े चार घंटे तक चली सर्जरी : विशाल की सर्जरी करने वाले वरिष्ठ सर्जन डॉ. बृजेश यादव ने बताया कि 31 जुलाई की रात गंभीर हालत में मरीज लाया गया था. केस को देखते हुए पूरी इमरजेंसी टीम को अलर्ट किया गया. तीन डॉक्टरों का पैनल, दो एनेस्थेटिस्ट और पैरामेडिकल स्टाफ इस ऑपरेशन में शामिल था.
रात करीब 12 बजे शुरू हुई सर्जरी तड़के 4:30 बजे तक चली. अब मरीज सामान्य खाना-पीना शुरू कर सकता है. मरीज को पूरी तरह ठीक देखकर उसके परिवारवाले और डॉक्टरों की टीम बेहद खुश है.
















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