कर्नाटक में लोकायुक्त ने एक घूसखोर तहसीलदार को दबोचा है. धारवाड़ के तहसीलदार सचिदानंद कुचनूर 50 लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों धराए गए हैं. तहसीलदार गणेश उत्सव और पूजा की तैयारी छोड़ घूस का बैग लेने पहुंचा था. जैसे ही हाथ में नोटों की गड्डी आई, लोकायुक्त की टीम ने उसे दबोच लिया. पकड़े जाते ही तहसीलदार साहब फूट-फूटकर रोने लगे और हाथ जोड़कर जिंदगी भर का अहसान मानने की दुहाई देने लगे. यह मामला धारवाड़ के पास पुणे-बेंगलुरु हाईवे पर मौजूद येरीकोप्पा गांव का है.
दरअसल, येरीकोप्पा गांव के एक किसान के पास 33 एकड़ जमीन है. वह अपनी 13 एकड़ जमीन पर कॉलोनी (रेजिडेंशियल लेआउट) काटना चाहता था. सरकारी नियम कहता है कि इसके लिए जमीन को ‘खेती के लायक नहीं’ घोषित कराना जरूरी होता है. जमीन मालिक जब इस मंजूरी के लिए तहसीलदार सच्चिदानंद के पास गया, तो साहब की नीयत डोल गई. उन्होंने काम करने के बदले सीधे 1 करोड़ रुपये नकद और 1 एकड़ जमीन अपने नाम करने की मांग रख दी.
करोड़ों में जमीन की कीमत: जिस जमीन को लेकर तहसीलदार ने इतना बड़ा दांव खेला, वह आज सोने के भाव बिक रही है. करीब 10 साल पहले तक यहां जमीन की कीमत 30 से 40 लाख रुपये प्रति एकड़ ही थी, लेकिन फिर यहां दो बड़े काम हो गए. पास में ही IIT धारवाड़ खुल गया और कर्नाटक हाई कोर्ट की धारवाड़ बेंच बन गई. इसके बाद तो जमीन के दामों में आग लग गई.
आज आलम यह है कि यहां जमीन का भाव करीब 1.5 करोड़ रुपये प्रति एकड़ तक पहुंच चुका है. यानी जिस 13 एकड़ जमीन की मंजूरी तहसीलदार की टेबल पर अटकी थी, उसकी बाजार में कीमत करीब 15 करोड़ रुपये बैठती है. बस, तहसीलदार की नजर इसी 15 करोड़ पर टिक गई और वे इसमें से अपना मोटा कट वसूलने के चक्कर में पड़ गए.
पूजा की तैयारी छोड़ घूस लेने पहुंचा था तहसीलदार: बुधवार दोपहर को पीड़ित जमीन मालिक सीधा लोकायुक्त पुलिस के पास पहुंच गया और पूरी बात बता दी. लोकायुक्त ने फौरन ट्रैप लगाने का प्लान तैयार किया. पीड़ित ने शाम 5:30 बजे तहसीलदार से मिलने का समय तय किया, लेकिन साहब उस वक्त नहीं मिले.
दरअसल, अगले दिन यानी गुरुवार को तहसीलदार दफ्तर के पास गणेश उत्सव, सत्यनारायण पूजा और भंडारे का बड़ा कार्यक्रम था. तहसीलदार सच्चिदानंद पूरे दिन उसी के इंतजाम में जुटे रहे. वे हलवाइयों, टेंट वालों और कारीगरों को एडवांस पैसे बांटने में मस्त थे. इधर पीड़ित ने उन्हें बार-बार फोन घुमाया और कहा, “साहब, 50 लाख रुपये का इतना बड़ा कैश लेकर घूमना खतरे से खाली नहीं है, जल्दी आइए.” 50 लाख का नाम सुनते ही तहसीलदार का लालच काबू से बाहर हो गया. रात करीब 8:30 बजे वे पूजा-पाठ की पूरी तैयारी बीच में ही छोड़ भागे और पीड़ित से कर्नाटक आर्ट्स कॉलेज के पास मिलने को कहा.
रोने लगा तहसीलदार: रात के करीब 9:30 बज रहे थे. तहसीलदार साहब अपनी गाड़ी लेकर कॉलेज के पास पहुंचे. पीड़ित ने जैसे ही 50 लाख रुपयों से भरा बैग उनकी तरफ बढ़ाया और साहब ने उसे हाथ में लिया, वैसे ही आसपास सादे कपड़ों में घात लगाए बैठी लोकायुक्त की टीम ने तुरंत गाड़ी को चारों तरफ से घेर लिया.नोटों के बैग के साथ रंगे हाथों पकड़ते ही तहसीलदार साहब के तोते उड़ गए. लोकायुक्त एसपी सिद्धलिंगप्पा ने बताया कि दबोचे जाने के बाद तहसीलदार फूट-फूटकर रोने लगे, हाथ जोड़कर छोड़ने की भीख मांगने लगे और कहने लगे कि मुझे जाने दो, जिंदगी भर आपका अहसान नहीं भूलूंगा. लेकिन लोकायुक्त ने एक न सुनी और मौके पर ही पूरे 50 लाख रुपये जब्त करके रात में ही मजिस्ट्रेट के सामने पेश कर साहब को सीधा जेल का रास्ता दिखा दिया गया.















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