बेडरूम में पूजा घर का होना विनाशकारी, पूरे परिवार को होता है तानव, आती है सुख समृद्धि में कमी

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घर में पूजा घर का स्थान बहुत मायने रखता है. यह न केवल वास्तु शास्त्र के अनुसार महत्वपूर्ण है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव परिवार के मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है. बेडरूम में पूजा घर बनाना एक बड़ी भूल हो सकती है. आइए जानते हैं, इस विषय में विस्तृत जानकारी-

बेडरूम में पूजा घर रखने से कई समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं. इसलिए, वास्तु शास्त्र और धार्मिक नियमों के अनुसार पूजा घर के लिए विशेष स्थान सुनिश्चित किया गया है, जिससे सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह हो और घर में सुख-समृद्धि बनी रहे.

पूजा घर की सही दिशा और स्थान का महत्व  

वास्तु शास्त्र के अनुसार, पूजा घर का स्थान ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा के बीच में होना चाहिए. यह दिशा देवताओं का वास स्थान मानी जाती है, जिसके अधिपति देवता बृहस्पति हैं.  ईशान कोण को वास्तु पुरुष के मस्तक का क्षेत्र माना गया है, जो अत्यंत संवेदनशील होता है. इस दिशा में पूजा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है.  

बेडरूम में पूजा घर क्यों नहीं बनाना चाहिए?  

सोने का स्थान ईशान कोण में नहीं होना चाहिए. हो सकता है कि आपके घर में पूजा स्थान ईशान कोण में हो लेकिन साथ में अगर आपका बेडरूम हो, तो यह वास्तु के अनुसार बिल्कुल गलत है. वहीं इसके विपरीत बेडरूम के लिए उपयुक्त स्थान दक्षिण है लेकिन यदि बेडरूम में पूजा स्थान भी है, तो यह भी बहुत खराब है. बेडरूम में पूजा स्थान न होने के कुछ मुख्य कारण है-

पवित्रता का भंग होना  

घर के पूजा स्थान की पवित्रता यदि शयनकक्ष के कारण भंग हो रही है, तो यह पूरे परिवार के लिए ठीक नहीं है. सोने और अन्य व्यक्तिगत गतिविधियों के कारण यह स्थान पूजा के योग्य नहीं रह जाता.  पूजा घर में सोना या किसी को वहां सोने की अनुमति देना शास्त्र के अनुसार वर्जित है. इससे पूजा घर की ऊर्जा प्रभावित होती है और नकारात्मक परिणाम उत्पन्न हो सकते हैं. 

मूर्तियों की देखभाल की कमी  

यदि पूजा घर में बड़ी मूर्तियां स्थापित की जाती हैं, तो उनकी देखभाल करना कठिन हो सकता है. वैदिक शास्त्रों के अनुसार, देवताओं की सही तरीके से सेवा न करने पर यह देव अपराध माना जाता है, जो अशुभ फल ला सकता है. 

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