सनातन धर्म में ज्येष्ठ मास को बेहद पवित्र और आध्यात्मिक उन्नति के लिए खास माना गया है. वैशाख पूर्णिमा के अगले दिन से इस पवित्र महीने का आरंभ होता है. हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल ज्येष्ठ महीना 2 मई से शुरू होकर 29 जून तक चलेगा. ज्येष्ठ हिंद कैलेंडर का तीसरा महीना होता है. इसका स्वामी मंगल होता है. चूंकि इस महीने की पूर्णिमा तिथि के साथ ज्येष्ठा नक्षत्र का खास संयोग बनता है, इसलिए इसे ज्येष्ठ कहते हैं. शास्त्रों में ज्येष्ठ महीने को दान-पुण्य और धार्मिक कार्यों के लिए बेहद शुभ और मंगलकारी माना गया है. ऐसे में आइए जानते हैं कि पवित्र ज्येष्ठ मास का महत्व, नियम और इस दौरान क्या करें और क्या नहीं.
ज्येष्ठ मास का महत्व: शास्त्रों के अनुसार, ज्येष्ठ महीने के आखिर दिन तीर्थ स्थलों में स्नान करने के साथ-साथ तिल और जल का दान करना चाहिए. इसके अलावा इस पवित्र महीने में एक समय ही भोजन करना चाहिए. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, ज्येष्ठ में पड़ने वाले मंगलवार का भी विशेष महत्व होता है. ज्येष्ठ महीने के मंगलवार को बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल कहा जाता है. पौराणिक मान्यता है कि इसी दिन प्रभु श्रीराम और हनुमान जी की पहली मुकालात हुई थी. मान्यता है कि ज्येष्ठ महीने के हर मंगलवार को हनुमान जी की उपसना करने और उन्हें बूंदी के लड्डू का भोग लगाने से जीवन में आ रही परेशानियां अपने आप समाप्त हो जाती हैं. इस महीने में गंगा दशहरा, निर्जला एकादशी और वट सावित्री जैसे बड़े व्रत-त्योहार मनाए जाते हैं.
कब से शुरू हो रहा है ज्येष्ठ मास? वैदिक पंचांग की गणना के अनुसार, इस साल ज्येष्ठ माह का शुभारंभ 2 मई से होने जा रहा है, जो 29 जून तक चलेगा. इस बार ज्येष्ठ मास की विशेषता यह है कि इसमें अधिक मास का संयोग बन रहा है, जिसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है. भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए यह समय किसी वरदान से कम नहीं होता.
ज्येष्ठ मास में क्या करें?
➤जल दान- इस महीने में प्यासों को पानी पिलाना सबसे बड़ा पुण्य माना गया है. पशु-पक्षियों के लिए पानी का इंतजाम करने से मानसिक शांति मिलती है.
➤तिल और सत्तू का दान- भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए तिल, अन्न और सत्तू का दान करें. इससे घर में सुख-समृद्धि का वास होता है.
➤एक समय भोजन- महाभारत के अनुशासन पर्व के अनुसार, जो व्यक्ति इस माह में सिर्फ एक समय भोजन करता है, वह निरोग और धनवान बनता है.
➤जल्दी उठें- सूर्योदय से पूर्व स्नान करना और वरुण देव की आराधना करना इस महीने में अत्यंत फलदायी है.
ज्येष्ठ में क्या न करें?
➤दिन में सोना- शास्त्रों के अनुसार ज्येष्ठ में दोपहर के समय सोने से बचना चाहिए, क्योंकि यह स्वास्थ्य और भाग्य दोनों के लिए अच्छा नहीं माना जाता. हालांकि बीमारी की स्थिति में आराम किया जा सकता है.
➤बैंगन का त्याग- इस महीने में बैंगन खाना वर्जित बताया गया है. आयुर्वेद के अनुसार यह शरीर में गर्मी और वात दोष बढ़ाता है. जबकि, धार्मिक मान्यताओं में इसे संतान के लिए कष्टकारी माना गया है.
➤जल की बर्बादी- चूंकि ज्येष्ठ जल के महत्व का महीना है, इसलिए पानी को व्यर्थ बहाना वरुण दोष का कारण बनता है.
➤भारी भोजन- गर्मी के कारण इस समय तामसिक और भारी भोजन से परहेज करना चाहिए ताकि शरीर स्वस्थ रहे.
















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