पुनीत शुक्ला, कानपुर।
कानपुर में साइबर ठगी करने वाले 8 लोग अरेस्ट किए गए हैं. इसमें अलग-अलग बैंकों के पांच अधिकारी शामिल हैं. यह साइबर ठगों को म्यूल खाते उपलब्ध कराते थे. यह गिरोह साइबर ठगी, डिजिटल अरेस्ट और फर्जी फर्म बनाकर ठगी की रकम ट्रांसफर कराता था. पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने इस पूरे सिंडिकेट का खुलासा किया है.
पिछले साल अक्टूबर 2025 में नवीं मुंबई में डिजिटल अरेस्ट कर 58 करोड़ की ठगी के बाद एक कानपुर के शुभम गौड़ के बैंक खाते में 2.5 करोड़ रुपए भेजे थे. इसी तरह देश में 17 अन्य हुए साइबर क्राइम में भी कानपुर के एक खाते का इस्तेमाल हुआ था. बर्रा पुलिस के पास NCRP पोर्टल से अलर्ट आया था. पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने इस पूरे सिंडिकेट का गुरुवार को खुलासा किया है.
पुलिस कमिश्नर ने बताया कि इस गिरोह का सरगना बर्रा सात निवासी राजवीर सिंह यादव है. वह फरार है। राजवीर ठगों को म्यूल अकाउंट मुहैया कराता था। जिसमें ब्लिंकिट में डिलीवरी बॉय वरुण विहार निवासी सोनू शर्मा के खाते में 67 करोड़ रुपए का ट्रांजेक्शन किया था. सोनू का अकाउंट फर्जी सिस्को कॉमर्स इंडिया कंपनी के नाम पर रजिस्टर्ड की गई थी.
पुलिस कमिश्नर ने बताया कि राजवीर को आगरा का अनचित गोयल हैंडल करता था. अनचित के ड्राइवर सतीश पांडेय के नाम आगरा के एसबीआई में राजाराम ट्रेडर्स के नाम से फर्जी फर्म रजिस्टर्ड है, उसके खाते में 53 करोड़ का ट्रांजेक्शन पाया गया है.
टैटू बनाने वाले गोविंद नगर 5-ब्लॉक निवासी साहिल विश्वकर्मा के खाते में एक करोड़ का ट्राजेंक्शन मिला है. चार माह में ठगों ने 125 करोड़ की ठगी की है। सोनू, सतीश व साहिल को ठगी की रकम का 10 प्रतिशत कमीशन मिलता था, उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है. राजवीर सिंह फिनो बैंक में फाइनेंस का काम करता था, जिस कारण वह कई बैंक कर्मियों के संपर्क में था.
गुजैनी के रहने वाले जिस शुभम गौड़ के खाते में ढाई करोड़ का लेनदेन हुआ था, उसमें इस समय 93 लाख रुपए मिले हैं. इस रकम को होल्ड करा दिया गया है. पुलिस के मुताबिक शुभम को पता भी नहीं था कि उसके खाते से लेनदेन हो रहा है.

साइबर ठगी में पकड़े गए लोग म्यूल खातों से साइबर ठगी की रकम मंगाते थे
सरकारी योजना का लाभ दिलवाने के लिए खाता खुलवाया, उसी से फ्रॉड: आवास, उद्यम सर्टिफिकेट व सरकारी योजनाओं का लाभ दिलवाने के नाम पर खाते खुलवाता था. इसके बाद खातों में आई रकम को राजवीर ट्रस्ट के खातों में और हवाला के जरिए देश के विभिन्न राज्यों में भेजता था. पुलिस कमिश्नर ने बताया कि ठगी की रकम खातों में भेजने पर ट्रस्ट रकम का 30 प्रतिशत हिस्सा लेते थे.
इसके बाद 10 प्रतिशत हिस्सा राजवीर अपने साथ काम करने वालों के लिए रखता था, बाकी 60 प्रतिशत रकम ठगों को दे दी जाती थी। पुलिस की जांच में कर्नाटक के अफजलपुर के जामिया इस्लामुल बन्नत ईसी ट्रस्ट का नाम सामने आया है, जिसमें डिजिटल अरेस्ट के 30 करोड़ रुपए भेजे गए थे.
इसके साथ ही खातों से भारी रकम का ट्रांजेक्शन कर महाराष्ट्र्र, गुजरात समेत देश के विभिन्न प्रदेशों में ठगी की रकम भेजी जाती थी, जिसका 10 से 20 प्रतिशत कमीशन लिया जाता था. पुलिस को राजवीर सिंह की लोकेशन छत्तीसगढ़ के पास मिली है.
अब जानिए बैंक कर्मी किस तरह करते थे ठगों की मदद: साइबर ठगों को मदद करने में बैंककर्मियों की भी बड़ी भूमिका सामने आई है. पुलिस ने जांच के बाद उन सभी को गिरफ्तार किया है.
➤स्वरूप नगर स्थित CSB बैंक के ब्रांच मैनेजर गुजैनी निवासी अमित कुमार.
➤कन्नौज के एक्सिस बैंक में ऑपरेशन हेड के रूप में कार्यरत बहराइच के आगापुर गांव, थाना जरवलरोड निवासी धर्मेंद्र सिंह.
➤कन्नौज के एक्सिस बैंक में डिप्टी मैनेजर रसूलाबाद के गांव रतनपुर निवासी अमित सिंह.
➤यूनिटी स्मॉल फाइनेंस बैंक में PR मैनेजर कल्याणपुर के साहब नगर निवासी आशीष कुमार.
➤बैंक एजेंट वरूण विहार निवासी तनिष गुप्ता को अरेस्ट किया है.

पकड़े गए 8 आरोपियों में पांच बैंक के अधिकारी हैं.
बैंक स्टाफ होल्ड एकाउंट की जानकारी ठगों से शेयर करता: साइबर ठगी से संबंधित खातों की जानकारी होने पर जब पुलिस बैंकों में होल्ड एप्लीकेशन देती थी, तो पकड़े गए बैंककर्मी ठगों को जानकारी दे देते थे जिस पर खाते होल्ड होने से पहले ठग ज्यादा से ज्यादा रकम निकाल लेते थे. पुलिस कमिश्नर ने बताया कि CSB बैंक के खाते होल्ड पर लगवाने के दौरान प्रति घंटे 4 से 5 लाख की रकम निकाली गई थी.
14 दिन में 90 लाख रुपए का खाते से लेनदेन किया गया, जिसकी खाताधारक को जानकारी नही है. इसके साथ ही बैंककर्मियों की मिलीभगत से ठग फर्जी जीएसटी फर्म का रजिस्ट्रेशन करा कर करंट अकाउंट खुलवाते थे. इसी तरह फर्जी ट्रस्ट अकाउंट भी खुलवाते थे जिससे पैसों की लेनदेन की लिमिट ज्यादा मिल सके.
खाते खुलवाने के बाद एटीएम, चेकबुक, पासबुक फर्जी एड्रेस पर भेज दिया जाता था, एड्रेस पर कोई न मिलने पर पार्सल वापस आ जाता था. इसके बाद बैंककर्मी डिलीवरी बॉय को फोन कर चेकबुक, पासबुक और एटीएम ठगों के हैंडओवर करा देते थे. ठगी से मिली रकम का 5 से 10 प्रतिशत हिस्सा बैंककर्मियों जाता था. इन बैंकों की पाई गई संलिप्तता पुलिस की जांच में यूपी ग्रामीण बैंक, जम्मूकश्मीर बैंक, सीएसबी बैंक, यूनिटी स्मॉल फाइनेंस बैंक, एक्सिस बैंक, महाराष्ट्रा ग्रामीण बैेक, यूको बैंक, सिटी यूनियन बैंक की संलिप्तता सामने आई है. इसके साथ ही पकड़े गए आरोपियों के पास 24 फर्जी जीएसटी फर्म, 16 म्यूल अकाउंट, 22 फर्जी सिम कार्ड, 9 मोबाइल मिले हैं.
















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