वाराणसी कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी: जिला जज भी बाहर आए, पूरे परिसर को खाली कराया

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वाराणसी जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर को बम से उड़ाने की धमकी मिली है. शुक्रवार को धमकी का ईमेल सरकारी मेल पर आया। इसका पता लगते ही हड़कंप मच गया. आनन-फानन में 200 से ज्यादा पुलिसवाले कोर्ट पहुंच गए. जिला जज भी कैंपस से बाहर आ गए. पुलिस ने पूरा परिसर खाली करवाया. कोर्ट के एक-एक कोने की जांच की जा रही है। कोर्ट की कार्रवाई को रोक दिया गया है.

वाराणसी पुलिस ने बम निरोधक दस्ता और डॉग स्क्वॉड की टीमों को भी मौके पर बुलाया. सभी एंट्री और एग्जिट पाइंट पर की जांच की गई. सीसीटीवी चेक किए गए.

अदालतों की कार्यवाही को अस्थायी रूप से रोक दिया गया: डीसीपी वरुणा प्रमोद कुमार के साथ पूरी फोर्स सुरक्षा के मद्देनजर कचहरी परिसर को खाली करने की अपील की गई है. वकीलों, न्यायालय कर्मचारियों और वादकारियों ने एहतियात के तौर पर परिसर खाली करना शुरू कर दिया है. अदालतों की कार्यवाही को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है.

पुलिस की साइबर टीम ईमेल की तकनीकी जांच में जुट गई है. ईमेल किस स्थान से और किस व्यक्ति द्वारा भेजा गया, इसका पता लगाने की कोशिश की जा रही है. अधिकारियों का कहना है कि धमकी को गंभीरता से लिया गया है और हर पहलू की जांच की जा रही है.

जिला प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों से बचने की अपील की है. फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन सुरक्षा के व्यापक इंतजाम जारी हैं.

ईमेल से धमकी मिलने के बाद जिला जज संजीव शुक्ला भी कचहरी परिसर से बाहर निकले.

इस धमकी को हल्के में नहीं लेना चाहिए: पूर्व बार अध्यक्ष विवेक शंकर तिवारी ने कहा- जनपद न्यायाधीश को ईमेल के जरिए कचहरी परिसर को बम से उड़ाने की सूचना मिली है. सूचना के बाद न्यायाधीश ने पुलिस प्रशासन को जानकारी दी. पुलिस ने आदेश जारी किया कि सभी कचहरी परिसर को खाली कर दें

जो आज मुकदमे लगे हैं, उनमें सामान्य तिथि घोषित की गई है. सभी लोग जा चुके हैं. तमाम चौकियां खाली हो चुकी हैं और तलाशी अभियान चल रहा है. 23 नवंबर 2007 को बम धमका हुआ था, एैसे में इस धमकी को हल्के में नहीं लेना चाहिए. 

दरअसल, वाराणसी कोर्ट में 23 नवंबर 2007 को बम विस्फोट हुआ था। इसमें 3 वकीलों समेत 9 की मौत हुई थी, जबकि 50 लोग घायल हुए थे. यही वजह है कि धमकी को पुलिस बेहद सीरियस ले रही है. अक्टूबर, 2022 में भी ज्ञानवापी पर दिए गए फैसले के बाद भी कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी मिली थी. इसके अलावा, 7 मार्च, 2006 को संकटमोचन मंदिर और कैंट रेलवे स्टेशन पर ब्लास्ट हुआ था, इसमें 18 की मौत हुई थी। 76 लोग घायल हुए थे.

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