पश्चिम बंगाल के सियासी रण के लिए कांग्रेस ने अकेले चुनाव लड़ने का फैसला करके बड़ा सियासी दांव खेला है. कांग्रेस पार्टी ने 284 सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है. 2026 की जंग में वाम दलों से दूरी रखकर कांग्रेस ने बड़ी चाल चली है. कभी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी रहे हुमायूं कबीर की नई पार्टी और असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM की बंगाल चुनाव में एंट्री के बाद कांग्रेस ने अपने काडर वोट बैंक और मुस्लिम वोट बैंक दोनों को अपने पाले में करके खुद को बंगाल में जिंदा करने की कोशिश की है.

बहरामपुर से अधीर रंजन चौधरी: सूची में मालदा से भूपेंद्र नाथ, बहरामपुर से अधीर रंजन चौधरी, भवानीपुर से प्रदीप प्रसाद और मौसम नूर को मालतीपुर सीट से टिकट देकर चुनावी मैदान में उतारा है. दिनहाटा से हरिहर राय को मौका मिला है. गौरतलब है कि हाल ही में मालदा की रसूखदार नेता मौसम नूर का टीएमसी छोड़कर कांग्रेस का दामन थामना, कांग्रेस के लिए पॉजिटिव संकेत दे रहा है. कांग्रेस की रणनीति एकदम साफ है मुस्लिम बहुल रणनीतिक क्षेत्र हो या बंगाल का कोई भी इलाका 2026 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी कम से कम अपना खाता खोलकर खुद को जिंदा करना चाहती है.
ममता के खिलाफ प्रदीप प्रसाद: कांग्रेस ने भवानीपुर से वर्तमान विधायक और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ प्रदीप प्रसाद को टिकट दिया है. जबकि बीजेपी ने टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी को हराने के लिए भवानीपुर सीट से विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी को उम्मीदवार बनाया है. हेमताबाद से अनामिका राय, जंगीपुर से मोहम्मद इमरान अली और तूफानगंज से देबेंद्रनाथ को कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार बनाया है.
2021 में कांग्रेस हुई क्लीन बोल्ड: गौरतलब है कि पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस खाता तक नहीं खोल सकी थी. कांग्रेस का कोई झंडा उठाने वाला नहीं बचा था. पिछले चुनाव में बीजेपी ने 77 सीटें जीतकर ‘दीदी’ और उनके भतीजे दोनों की सांसे फुला दी थीं.














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