कानपुर में किडनी के सौदागरों के बड़े रैकेट का पर्दाफाश, शहर के 3 अस्पतालों में एक साथ रेड

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पुनीत शुक्ला, कानपुर। ​
कानपुर से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने मानवता को शर्मसार कर दिया है. एक तरफ पढ़ाई का जुनून और दूसरी तरफ गरीबी का फायदा उठाने वाले सफेदपोश दरिंदे. एमबीए (MBA) की फीस भरने के चक्कर में एक छात्र ने अपनी किडनी तक बेच दी. पुलिस के रडार पर शहर के कई बड़े अस्पताल और रसूखदार नाम हैं.

फिलहाल पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शहर के 3 बड़े अस्पतालों में एक साथ छापेमारी की जिसमें ICU में भर्ती डोनर और रिसीवर मिले. डोनर से 60 लाख रुपए में किडनी का सौदा किया गया, लेकिन महज साढ़े 9 लाख दिए गए जिसके बाद उत्तराखंड के लड़के से विवाद हो गया तो मामला उजागर हो गया.

शुरूआती जांच में सामने आया कि किडनी ट्रांसप्लांट करने के लिए लखनऊ और दिल्ली से डॉक्टरों की टीम आती थी. देश के अलग-अलग राज्यों से युवकों को जाल में फंसाकर किडनी का सौदा किया जाता था.

पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने कहा- अभी इस पूरे पर कार्रवाई चल रही है जो भी अस्पताल इसमें शामिल हैं, उनकी बारीकी से जांच की जा रही है. किडनी ट्रांसप्लांट सिंडीकेट का जल्द खुलासा करेंगे.

उत्तराखंड से जुड़े किडनी रैकेट के तार: पुलिस का कहना है कि कल्याणपुर के आवास विकास तीन में बने एक आपर्टमेंट में शिवम अग्रवाल उर्फ शिवम काड़े ने आयुष को पैसों का लालच देकर उत्तराखंड से कानपुर बुलवाया. उनके बीच बाचतीत में एक मरीज को किडनी बेचने की बात तय हुई. शिवम ने आयुष को 60 लाख रुपए दिलाने का वादा किया.

दोनों का रावतपुर के एक नामी अस्पताल में किडनी ट्रांसप्लांट हुआ. किडनी डोनेट करने के बाद आयुष को महज 9.50 लाख दिए गए, तो विवाद हो गया. पुलिस और स्वास्थ्य विभाग को इसकी जानकारी मिली.

समस्तीपुर के आयुष का केस:​ ऐसे ही बिहार के समस्तीपुर का रहने वाला आयुष, जो मेरठ में रहकर एमबीए की पढ़ाई कर रहा था, फाइनल ईयर की फीस के इंतजाम के लिए एक ऐसे जाल में फंसा जहां से निकलना नामुमकिन था.

आयुष का सौदा 9 लाख रुपये में तय हुआ था, जिसमें से उसे अब तक महज 5 लाख रुपये ही मिले हैं. बाकी के 4 लाख रुपये के लिए जब उसने दबाव बनाया, तब इस पूरे खेल का पर्दाफाश हुआ.

अंगो के सौदे का ​मास्टरमाइंड वार्डबॉय बना ‘डॉक्टर’: सूत्रों की मानें इस पूरे गिरोह का मुख्य सरगना शिवम् अग्रवाल उर्फ शिवम् काना बताया जा रहा है. शिवम् असल में एक नर्सिंग होम का वार्डबॉय है, लेकिन वह खुद को डॉक्टर बताकर मजबूर लोगों को अपने जाल में फंसाता था. इसके बाद आहूजा नर्सिंग होम में सर्जरी की जाती और सर्जरी के बाद डोनर और रिसीवर को अलग अलग अस्पतालों में भर्ती करा दिया जाता था. आहूजा नर्सिंग होम के डॉ सुरजीत सिंह आहूजा उनकी पत्नी डॉ प्रीति आहूजा और शिवम् अग्रवाल फिलहाल पुलिस की गिरफ्त में है. ​पुलिस जांच में सामने आया है कि इस अवैध ट्रांसप्लांट को वैध दिखाने के लिए आयुष को किडनी लेने वाली महिला का ‘दूर का भाई’ बताया गया था. कागजों में हेरफेर कर इसे इमोशनल डोनेशन का रूप दिया गया.

पुलिस ने अब तक 6 अस्पतालों में छापेमारी की: इसके बाद टीमें बनाकर छापेमारी की गईं, तो कल्याणपुर के आहूजा अस्पताल के आईसीयू में 2 युवक एडमिट मिले. 24 घंटे तक दोनों को यहीं रखा गया. इसके बाद डोनर आयुष को वहां से हटाकर कल्याणपुर आवास विकास तीन में बने मेड लाइफ हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया.

डॉक्टरों की टीम की पूछताछ में कई अहम इनपुट सामने आए हैं. इसके बाद पुलिस ने शहर के 3 बड़े अस्पतालों में छापेमारी की. वहां से मिले इनपुट के आधार पर 3 अन्य अस्पताल में भी टीम गई. तीन अस्पतालों के संचालकों को हिरासत में लिया गया. मामला तूल पकड़ता देख आहूजा हॉस्पिटल के संचालक ने कल्याणपुर के प्रिया हॉस्पिटल में किडनी लेने वाले मरीज को भर्ती करा दिया. पूछताछ में मामला खुला तो पुलिस की टीम सोमवार देर शाम को प्रिया सरोज हॉस्पिटल पहुंची. जहां से पुलिस टीम परिजनों से पूछताछ कर रही है. पुलिस की टीमें डोनर और किडनी लेने वाले दोनों मरीजों तक पहुंच गई है.

टीम में शामिल अफसरों की मानें तो कानपुर में किडनी ट्रांसप्लांट से संबंधित कई अहम इनपुट मिले हैं. टीमें लगातार छापेमारी और जांच-पड़ताल कर रही हैं. जल्द ही पूरे सिंडीकेट का खुलासा करके आरोपियों को जेल भेजा जाएगा.

3 हॉस्पिटल संचालकों से चल रही पूछताछ: टीम ने कल्याणपुर के मेड लाइफ हॉस्पिटल, रावतपुर स्थित आहूजा हॉस्पिटल और पनकी रोड के प्रिया हॉस्पिटल में ताबड़तोड़ छापेमारी की. जांच के दौरान चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं. पुलिस आहूजा हॉस्पिटल की मालकिन डॉ. प्रीति आहूजा, उनके पति डॉ. सुरजीत सिंह आहूजा और एक सक्रिय दलाल शिवम अग्रवाल उर्फ ‘काना’ को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है.

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