कैश कांड में फंसे इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा ने अपना इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा सौंप दिया है. आपको बता दें कि उनके दिल्ली वाले आवास पर जले हुए कैश मिले थे. इस विवाद के बाद उनका दिल्ली हाईकोर्ट से वापस इलाहाबाद तबादला कर दिया गया था. उन्होंने 5 अप्रैल, 2025 को शपथ ली थी। फिलहाल उनके खिलाफ आरोपों के संबंध में एक आंतरिक जांच चल रही है.
इस मामले की जांच के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा गठित तीन सदस्यीय समिति आगामी मानसून सत्र में अपनी रिपोर्ट सौंप सकती है. पिछले साल 12 अगस्त को न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा को पद से हटाने की मांग वाला एक बहुदलीय नोटिस स्वीकार करने के बाद महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करने के संदर्भ में उनके खिलाफ आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया था.
इससे पहले जनवरी में सुप्रीम कोर्ट ने यशवंत वर्मा की ओर से दायर उस रिट याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 के तहत जांच समिति गठित करने के लोकसभा अध्यक्ष के फैसले को चुनौती दी थी. यह निर्णय न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने सुनाया था.
21 जुलाई, 2025 को संसद के दोनों सदनों में न्यायमूर्ति वर्मा के महाभियोग की मांग करने वाले अलग-अलग प्रस्ताव पेश किए गए थे. उसी दिन, तत्कालीन राज्यसभा सभापति जगदीप धनखड़ ने अपना इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद, 11 अगस्त को राज्यसभा के उपसभापति ने उच्च सदन में पेश किए गए प्रस्ताव को खारिज कर दिया. एक दिन बाद, 12 अगस्त को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्ति अरविंद कुमार, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मौजूदा मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एम.एम. श्रीवास्तव और वरिष्ठ अधिवक्ता बी.वी. आचार्य की सदस्यता वाली एक जांच समिति के गठन की घोषणा की.















Leave a Reply