पुनीत शुक्ला, कानपुर।
कानपुर के परमट स्कूल निर्माण की मांग को लेकर सपा विधायक अमिताभ बाजपेई को नजरबंद किया गया है. विधायक ने स्कूल बनने तक चप्पल न पहनने और राजनीतिक कार्यक्रमों से दूर रहने का संकल्प लिया है. प्रशासन ने शुक्रवार सुबह विधायक को उनके आवास पर नजरबंद कर दिया, जिसके विरोध में विधायक ने एक ऐसा संकल्प लिया है जिसने शहर के सियासी गलियारे में हलचल मचा दी है.
सपा विधायक ने सबके सामने कुर्ता निकालकर फेंक दिया. बोले- संकल्प लेता हूं जब तक स्कूल नहीं बनेगा तब तक कुर्ता और चप्पल नहीं पहनूंगा. उन्होंने डमरू बजाते हुए कहा- बच्चों का सपना अधूरा, बाबा भोलेनाथ करेंगे पूरा. कसम संविधान की खाते हैं, स्कूल वहीं बनाएंगे.
बता दें परमट प्राथमिक स्कूल में सपा विधायक शिलान्यास करने के लिए आज यानी 15 मई की तारीख के बैनर लगवाए थे. इससे पहले बुधवार को सपा विधायक अमिताभ बाजपेयी और बीजेपी नेता सुरेश अवस्थी के समर्थकों की आमने-सामने नारेबाजी हुई थी,
छावनी बना विधायक का आवास: देर रात से ही अमिताभ बाजपेई के आवास के बाहर भारी संख्या में पुलिस बल और पीएसी तैनात कर दी गई थी. सुबह होते ही जब समर्थकों ने विधायक के घर जुटना शुरू किया, तो पुलिस ने सुरक्षा घेरा और कड़ा कर दिया. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है. हालांकि, विधायक ने इसे लोकतंत्र की हत्या और विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश करार दिया है.
विधायक का संकल्प- त्याग से दिलाएंगे स्कूल का हक: नजरबंदी के बीच अमिताभ बाजपेई ने मीडिया से बात करते हुए एक बड़ा संकल्प लिया. उन्होंने घोषणा की कि जब तक परमट का प्राथमिक विद्यालय बनकर तैयार नहीं हो जाता, तब तक वह-
➤पैरों में चप्पल या जूता नहीं पहनेंगे.
➤शरीर पर केवल साधारण वस्त्र वो भी ऊपर के धारण करेंगे.
➤किसी भी राजनीतिक कार्यक्रम या पार्टी की औपचारिक मीटिंग में हिस्सा नहीं लेंगे.

विधायक ने भावुक होते हुए कहा, यह बच्चों के भविष्य का सवाल है. अगर सरकार और प्रशासन जनहित के काम को रोकने के लिए पुलिस का सहारा ले रहे हैं, तो मैं भी सत्याग्रह के मार्ग पर चलूंगा. जब तक स्कूल की ईंट-ईंट नहीं लग जाती, मैं सुख-सुविधाओं का त्याग करता हूं.
क्या है पूरा विवाद? दरअसल, परमट स्थित प्राथमिक विद्यालय काफी समय से जर्जर स्थिति में था, जिसे ढहा दिया गया था. स्थानीय निवासियों और विधायक का आरोप है कि इस बेशकीमती जमीन पर भू-माफियाओं की नजर है और प्रशासन स्कूल बनाने में जानबूझकर देरी कर रहा है. सपा विधायक लगातार मांग कर रहे हैं कि यहां जल्द से जल्द सरकारी स्कूल का भवन बने ताकि गरीब बच्चों की शिक्षा बाधित न हो.
सोशल मीडिया पर छिड़ी जंग: विधायक की नजरबंदी की खबर फैलते ही सोशल मीडिया पर उनके समर्थकों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. सपा कार्यकर्ताओं का कहना है कि एक जनप्रतिनिधि को जनता के काम के लिए भूमि पूजन करने से रोकना तानाशाही है. वहीं, बीजेपी खेमे का मानना है कि विधायक बिना अनुमति के कार्यक्रम कर शहर की फिजा बिगाड़ना चाहते हैं.
















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