UPPCS परीक्षा के प्रतियोगी छात्रों का फूटा गुस्सा, मोबाइल टोर्च की रौशनी में रात में भी प्रदर्शन

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यूपी पीसीएस (UPPCS) और आरओ/एआरओ (RO ARO)की प्रारंभिक परीक्षाएं एक से अधिक दिन और पालियों में कराने के फैसले के खिलाफ प्रतियोगी छात्रों का गुस्सा सोमवार को फूट पड़ा. उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों, नई दिल्ली समेत आसपास के राज्यों के हजारों छात्रों ने सोमवार से उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के बाहर पहुंचकर बेमियादी धरना शुरू कर दिया है और किसी सूरत में मानकीकरण (नॉर्मलाइजेशन) को स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं. दिन भर ताली थाली बजाकर धरना प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने सूरज ढलते ही मोबाइल टार्च जलाकर एकजुटता का प्रदर्शन किया. अब प्रयागराज की सड़कों पर उतर गए छात्र आर या पार के मूड में आ गए हैं.

‘देखना, सुनना व सच कहना जिन्हें भाता नहीं, कुर्सियों पर फिर वही बापू के बंदर आ गए’ व्यवस्था पर चोट करती अदम गोंडवी की ये लाइनें सोमवार को लोक सेवा आयोग के बाहर प्रदर्शन में प्रतियोगी छात्रों की आवाज बुलंद करती रही. शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन कर रहे छात्रों ने प्रतीकों और क्रांतिकारी नारों का सहारा लिया. कई छात्रों ने हाथ में भगत सिंह, चन्द्रशेखर आजाद, महात्मा गांधी की तस्वीरे ले रखी थीं तो कुछ हाथ में तिरंगा भी लहरा रहे थे.

छात्रों ने आयोग के बाहर सड़क पर चूने से बड़े-बड़े अक्षरों से ‘लूट आयोग’ और ‘लीक आयोग’ लिख दिया था। एक छात्र की तख्ती पर लिखा था ‘अहा टमाटर बड़ा मजेदार, नॉर्मलाइजेशन है बेकार’ तो एक अन्य ने ‘उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग वर्ष 2024 का मेरा रिपोर्ट कार्ड निल बटे सन्नाटा’ लिखी तख्ती ले रखी थी. एक छात्र ने अपने चेहरे को कागज से ढक रखा था जिस पर लिखा था-‘सरकार हमारी अंधी है, आयोग हमारा अंधा है, नॉर्मलाइजेशन बस बैकडोर का धंधा है.’

एक छात्रा ने नारा दिया-‘बेटियों ने ली पढ़ने की जिम्मेदारी, अब अगर आगे न बढ़ें तो है गलती तुम्हारी’। एक्स, फेसबुक, यू-ट्यूब, टेलीग्राम आदि सोशल मीडिया मंच पर भी यह मुद्दा पूरे दिन छाया रहा. आयोग के बाहर लड़के प्रदर्शन कर रहे थे तो वहीं सोशल मीडिया यूजर्स भी अपने-अपने एकाउंट और हैंडल पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं. एक यूजर ने फेसबुक पर लिखा-‘जिस ओर जवानी चलती है उस ओर जमाना चलता है.’ कुछ छात्रों ने बाकायदा हैंडबिल बनवाकर बंटवाया और फेसबुक पर संदीप मिश्रा ने लिखा-मैं गांधी भी हूं और भगत भी’.

आयोग ने दो दिन परीक्षा कराने की सूचना पांच नवंबर को जारी की थी। उसी दिन से प्रतियोगी छात्रों ने 11 नवंबर से घेराव के लिए सोशल मीडिया पर अभियान चलाना शुरू कर दिया था। एक्स, फेसबुक और टेलीग्राम आदि सोशल मीडिया मंच के माध्यम से अपील की जा रही थी जिसका नतीजा सोमवार को देखने को मिला. छात्रों के विरोध को देखते हुए प्रशासन ने पहले से तैयारी कर रखी थी.

सुबह दस बजे ही आयोग और एनआईपी चौराहे पर बैरीकेडिंग कर दी गई थी लेकिन 11 बजते-बजते आयोग चौराहे पर इतनी अधिक संख्या में छात्र जुट गए कि पुलिस और पैरामिलिट्री के जवानों को उन्हें रोकना मुश्किल हो गया. छात्र बैरीकेडिंग गिराकर दो नंबर गेट की तरफ बढ़ने लगे तो कुछ पुलिसकर्मियों ने लाठी लेकर दौड़ाया और एक छात्र को लाठी लगी भी. लेकिन बढ़ती भीड़ देख सुरक्षाकर्मी किनारे हो गए और आयोग के चारों तरफ का इलाका पूरी तरह से छात्रों के कब्जे में आ गया.

सुबह 11 बजे से हजारों छात्र आयोग के बाहर जमे तो सोमवार रात तक डटे रहे. छात्रों का दावा है कि शाम पांच बजे के आसपास भी पुलिसकर्मियों ने लाठियां लेकर दौड़ाया हालांकि किसी को कोई चोट नहीं लगी. डीसीपी सिटी अभिषेक भारती ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान किसी प्रकार का कोई भी बल प्रयोग नहीं किया गया है. सभी छात्रों से शांतिपूर्वक वार्ता की जा रही है.

आयोग और छात्रों के बीच गतिरोध बरकरार

पीसीएस और आरओ/एआरओ जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं में मानकीकरण (नॉर्मलाइजेशन) को लेकर लोक सेवा आयोग और प्रतियोगी छात्रों के बीच गतिरोध बना हुआ है. छात्रों का कहना है कि नॉर्मलाइजेशन की अधिसूचना निरस्त होने के बाद ही धरना समाप्त होगा. उसके अलावा किसी सूरत में धरनास्थल से नहीं हटेंगे.

वहीं आयोग के अफसरों का कहना है कि उनके पास पीसीएस 2024 की प्रारंभिक परीक्षा दो दिन कराने के अलावा कोई विकल्प नहीं है. पीसीएस में कुल पंजीकृत 576154 अभ्यर्थियों के लिए एक दिन में परीक्षा कराने के लिए सभी 75 जिलों से 1758 परीक्षा केन्द्रों की आवश्यकता है लेकिन हर सम्भव प्रयास के बावजूद मात्र 435074 अभ्यर्थियों की क्षमता के 978 केन्द्र ही मिल सके हैं.

21 अक्तूबर को हजारों छात्रों ने दी थी चेतावनी

मानकीकरण (नॉर्मलाइजेशन) की सुगबुगाहट मिलते ही प्रतियोगी छात्रों ने विरोध शुरू कर दिया था. हजारों छात्रों ने 21 अक्तूबर को भी आयोग के गेट नंबर दो पर जमकर प्रदर्शन किया था. उस दिन सचिव अशोक कुमार ने प्रदर्शनकारियों से वार्ता में कहा था कि अभी आयोग ने दो दिन परीक्षा का कोई निर्णय नहीं लिया है. हालांकि पांच नवंबर को दो दिन परीक्षा कराने की सूचना जारी होने के बाद छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा. अपने को ठगा महसूस कर रहे छात्रों ने सोमवार से आयोग के बाहर बेमियादी डेरा डाल दिया है.

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