कोडीन कफ सिरप में बड़ी कार्रवाई, फर्म मालिक गिरफ्तार; 10,500 बोतलों की अवैध खरीद-फरोख्त का खुलासा

Spread the love

पुनीत शुक्ला, कानपुर।
कानपुर में नशीली और प्रतिबंधित दवाओं के अवैध कारोबार पर पुलिस ने बड़ा शिकंजा कसा है. पुलिस कमिश्नरेट की क्राइम ब्रांच ने कार्रवाई करते हुए एक फर्म मालिक विशाल सिंह सिसोदिया को गिरफ्तार किया है. आरोप है कि कोडीन युक्त प्रतिबंधित सिरप की हजारों बोतलों की अवैध खरीद-फरोख्त की जा रही थी. मामले में डिजिटल साक्ष्य भी बरामद किए गए हैं. फॉरेंसिक जांच जारी है.

जानकारों की मानें तो विशाल सिंह सिसोदिया की गिरफ्तारी इस मामले में मील का पत्थर मानी जा रही है. इससे पहले, पुलिस ने इसी गिरोह से जुड़े अग्रवाल ब्रदर्स के संचालक विनोद अग्रवाल को गिरफ्तार कर जेल भेजा था. विनोद अग्रवाल से पूछताछ के दौरान ही विशाल सिसोदिया की इस अवैध नेटवर्क में सक्रिय भूमिका की पुष्टि हुई थी.

डीसीपी क्राइम श्रवण कुमार सिंह ने बताया कि पुलिस कमिश्नरेट की क्राइम ब्रांच ने अवैध कोडीन सिरप नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए थाना हनुमंत विहार क्षेत्र में छापेमारी की. कार्रवाई के दौरान एक फर्म मालिक को गिरफ्तार किया गया, जो कथित तौर पर अपनी मेडिकल फर्म के माध्यम से प्रतिबंधित कोडीन युक्त ‘फैंसीपिक-टी’ सिरप की अवैध बिक्री में संलिप्त था.

डीसीपी सिंह के मुताबिक, जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी ने विभिन्न तिथियों में भारी मात्रा में कोडीन युक्त दवाइयों की खरीद की. विशेष रूप से इरफिका लाइफसाइंसेज, लखनऊ से 5250 बोतलें खरीदी गईं. इसके अतिरिक्त अन्य स्रोतों से कुल 10,500 से अधिक बोतलों की खरीद की पुष्टि हुई है.

जांच के दौरान यह भी पाया गया कि खरीद-फरोख्त से संबंधित कोई वैध अभिलेख प्रस्तुत नहीं किए गए. स्टॉक रजिस्टर, बिल-वाउचर और अन्य दस्तावेजों में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं. पुलिस का कहना है कि यह कारोबार नियमों का उल्लंघन करते हुए जानबूझकर और सुनियोजित तरीके से किया जा रहा था. मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं और एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है. पुलिस ने आरोपी को 3 मार्च 2026 को विधिवत गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तारी के दौरान आरोपी के कब्जे से एक लैपटॉप बरामद किया गया, जिसका इस्तेमाल फर्जी बिल तैयार करने और अभिलेखों में हेरफेर के लिए किया जाता था.

बरामद डिजिटल उपकरणों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है ताकि इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का वैज्ञानिक और तकनीकी विश्लेषण किया जा सके. पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है. पता लगाया जा रहा है कि इस अवैध सप्लाई चेन में और कौन-कौन लोग शामिल थे. आपूर्तिकर्ताओं और संभावित ग्राहकों की भूमिका की भी गहन जांच की जा रही है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *