लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद से यूपी में भाजपा ने बड़ा एक्शन लिया है. यूपी के 75 में से 74 जिलों के प्रभारी मंत्रियों को बदल दिया गया है. गुरुवार की शाम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने सभी मंत्रियों की बैठक भी बुलाई थी. इसी बैठक के बीच ही यह फैसला लिया गया है. फिलहाल दोनों डिप्टी सीएम केशव मौर्य और ब्रजेश पाठक को कोई जिला नहीं दिया गया है. लोकसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन और आने वाले उपचुनाव को देखते हुए प्रभारियों का बदलाव किया गया है. केवल पीलीभीत में बदलाव नहीं किया गया है. पीलीभीत के प्रभारी मंत्री बलदेव औलख ही रहेंगे. स्वतंत्र प्रभारमंत्री दयाशंकर सिंह पहले उन्नाव-देवरिया के प्रभारी थे अब कानपुर नगर को देखेंगे.
खास जिलों की बात करें तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी की जिम्मेदारी जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह को दी गई है. उन्हें अमेठी का भी जिम्मा मिला है. अयोध्या के प्रभारी मंत्री सूर्य प्रताप शाही को अब लखनऊ की जिम्मेदारी मिली है. अखिलेश यादव के इलाके मैनपुरी की जिम्मेदारी प्रदेश के शिक्षा मंत्री और कल्याण सिंह के बेटे संदीप सिंह को दी गई है. इसी तरह योगी के जिले गोरखपुर की जिम्मेदारी संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना को मिली है. उनके पास अंबेडकरनगर का भी प्रभार रहेगा.
सीएम योगी के आवास पर हुई मंत्रीपरिषद की बैठक मेंं दोनो डिप्टी सीएम और सभी मंत्री मौजूद रहे. भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी और संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह ने भी इस दौरान जरूरी निर्देश दिए. मुख्यमंत्री ने विधानसभा उपचुनाव को लेकर की गई तैयारियो की समीक्षा भी की. सुशासन, संवाद व समन्वय का मंत्र दिया. बैठक में प्रभारी मंत्रियो के जिलों में हुए अब तक के काम-काज की समीक्षा की गई. इसी के बाद प्रभारी मंत्रियो के जिलों में बदलाव किया गया.
सुभासपा प्रमुख और कैबिनेट मंत्री ओपी राजभर और दारा सिंह चौहान के पास अभी तक किसी जिले का प्रभार नहीं था. अब दोनों को दो-दो जिले मिल गए हैं. ओपी राजभर को देवरिया और भदोही जिले का प्रभारी बनाया गया है. दारा सिंह चौहान को फतेहपुर और बलिया का प्रभारी नियुक्त किया गया है.
किस मंत्री को मिली कौन से जिले की जिम्मेदारी
सूर्य प्रताप शाही पहले अयोध्या-आजमगढ़ अब लखनऊ-संतकबीर नगर
सुरेश खन्ना पहले गोरखपुर-लखनऊ अब गोरखपुर-अंबेडकरनगर
स्वतंत्रदेव सिंह पहले प्रयागराज-बांदा अब वाराणसी-अमेठी
बेबी रानी मौर्य पहले झांसी-कानपुर देहात अब बुलन्दशहर- शामली
लक्ष्मी नारायण चौधरी पहले अलीगढ़-इटावा अब मेरठ-बागपत
जयवीर सिंह पहले वाराणसी-बरेली अब प्रयागराज-रायबरेली
धर्मपाल सिंह पहले मेरठ-संभल अब लखीमपुर खीरी-श्रावस्ती
नन्द गोपाल गुप्ता नंदी पहले कानपुर नगर-मिर्जापुर अब मिर्जापुर-चन्दौली
अनिल राजभर पहले गोण्डा-मऊ अब आजमगढ-कुशीनगर
राकेश सचान पहले बस्ती-फतेहपुर अब जौनपुर-गाजीपुर
अरविंद कुमार शर्मा पहले आगरा-सिद्वार्थनगर अब बस्ती-महाराजगंज
योगेन्द्र उपाध्याय पहले सहारनपुर-फर्रुखाबाद अब झांसी-कासगंज
आशीष पटेल पहले लखीमपुर खीरी-सुल्तानपुर अब फर्रुखाबाद-कन्नौज
संजय निषाद पहले बहराइच-औरेया अब कौशाम्बी-सिद्धार्थनगर
ओम प्रकाश राजभर पहले कोई नहीं अब देवरिया-भदोही
दारा सिंह चौहान पहले कोई नहीं अब फतेहपुर-बलिया
सुनील कुमार शर्मा पहले कोई नहीं अब अलीगढ़-फिरोजाबाद
अनिल कुमार पहले कोई नहीं अब अमरोहा-चित्रकूट
स्वतंत्र प्रभार वाले राज्यमंत्रियों को मिले जिले
नितिन अग्रवाल पहले बलरामपुर-शाहजहांपुर अब शाहजहांपुर-मुरादाबाद
कपिल देव अग्रवाल पहले बिजनौर-हापुड़ अब आगरा-सहारनपुर
रवीन्द्र जायसवाल पहले सोनभद्र-गाजीपुर अब प्रतापगढ-हमीरपुर
संदीप सिंह पहले मथुरा-कासगंज अब औरेया-मैनपुरी
गुलाब देवी पहले बदायुं अब हापुड़
गिरीश चन्द्र यादव पहले अंबेडकरनगर-अमेठी अब इटावा-सीतापुर
धर्मवीर प्रजापति पहले जालौन अब बांदा
जेपीएस राठौर पहले रामपुर-हरदोई अब गाजियाबाद-रामपुर
दयाशंकर सिंह पहले उन्नाव-देवरिया अब कानपुर नगर
नरेन्द्र कश्यप पहले शाहजहांपुर-चित्रकूट अब बरेली
दिनेश प्रताप सिंह पहले जौनपुर-महोबा अब अयोध्या (फैजाबाद)
अरुण कुमार सक्सेना पहले बुलंदशहर अब गौतमबुद्ध न्गर
दयाशंकर दयालु पहले महाराजगंज अब गोंडा















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