आज 8 नवंबर को देशभर में धूमधाम से दिवाली का त्योहार मनाया जा रहा जा रहा. यह पर्व हर साल कार्तिक अमावस्या पर मनाया जाता है. इस बार कार्तिक अमावस्या तिथि 8 नवंबर को सुबह 11 बजकर 27 मिनट से शुरू होकर 9 नवंबर को दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक रहेगी. मान्यता है कि दिवाली पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की विधिवत पूजा से धनधान्य में खूब वृद्धि होती है. घर की सुख-संपन्नता बढ़त पर रहती है. दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश की पूजा के लिए प्रदोष काल को सबसे उत्तम माना जाता है. प्रदोष काल यानी लक्ष्मी पूजा का समय शाम 5 बजकर 31 मिनट से शाम 8 बजकर 09 मिनट तक रहने वाला है. हालांकि भौगोलिक विषमता के कारण यह मुहूर्त देश के बड़े शहरों में थोड़ा अलग भी हो सकता है. इसलिए पूजा से पहले अपना स्थानीय पंचांग जरूर देख लें.
सबसे शुभ मुहूर्त, शाम 5:54 से 7:50 बजे तक करें पूजा: दिवाली पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा के लिए शाम का समय विशेष माना गया है. 8 नवंबर 2026 को दिल्ली में लक्ष्मी पूजन का मुख्य शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 54 मिनट से रात 7 बजकर 50 मिनट तक रहेगा. इस दौरान भक्तों को मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए. इस मुहूर्त की अवधि 1 घंटा 56 मिनट है. पंचांग के अनुसार यह समय प्रदोष काल और वृषभ काल के संयोग में पड़ रहा है.
व्यापारियों के लिए ये शुभ चौघड़िया मुहूर्त
➤अमृत चौघड़िया: सुबह 11:28 बजे से दोपहर 12:04 बजे तक
➤शुभ चौघड़िया: दोपहर 1:25 बजे से 2:46 बजे तक
➤शुभ चौघड़िया: शाम 5:27 बजे से 7:06 बजे तक
➤अमृत चौघड़िया: शाम 7:06 बजे से रात 8:46 बजे तक
➤चर चौघड़िया: रात 8:46 बजे से 10:25 बजे तक
चोपड़ा पूजन में किनकी पूजा करें? चोपड़ा पूजन के दौरान व्यापारी भगवान गणेश, मां लक्ष्मी और मां सरस्वती की पूजा करते हैं. नए बही-खाते, कलम, तिजोरी और कारोबारी दस्तावेजों को पूजा स्थल पर रखकर उन पर रोली, अक्षत और फूल चढ़ाए जाते हैं. इसके बाद धूप-दीप दिखाकर नए कारोबारी साल की अच्छी शुरुआत की कामना की जाती है.
दीपावली पर कैसे करें मां लक्ष्मी की पूजा?
- सबसे पहले घर की पूर्व दिशा या ईशान कोण में एक साफ चौकी स्थापित करें.
- चौकी पर लाल या गुलाबी रंग का कपड़ा बिछाएं.
- अब चौकी पर भगवान गणेश की प्रतिमा रखें और उनके दाहिनी ओर मां लक्ष्मी की मूर्ति स्थापित करें.
- पूजा के लिए आसन पर बैठें और अपने चारों ओर जल छिड़ककर पूजा स्थल को शुद्ध करें.
- इसके बाद पूजा का संकल्प लेकर विधि-विधान से आराधना शुरू करें.
- एक मुखी घी का दीपक जलाकर पूजा का शुभारंभ करें.
- मां लक्ष्मी और भगवान गणेश को फूल, मिठाई और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें.
- सबसे पहले भगवान गणेश के मंत्रों का जाप करें. इसके बाद मां लक्ष्मी के मंत्रों का उच्चारण करें.
- पूजा के अंत में दोनों देवी-देवताओं की आरती उतारें और शंख बजाकर पूजा संपन्न करें.
- घर में दीपक जलाने से पहले पांच दीपकों को एक थाली में रखकर उनकी पूजा करें. उन पर फूल आदि अर्पित करने के बाद घर के अलग-अलग हिस्सों में दीपक सजाएं.
- घर के अलावा मंदिर और कुएं के पास भी दीपक जलाने की परंपरा है.
- दीपावली की पूजा के दौरान लाल, पीले या चमकीले रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है. वहीं, काले, भूरे और नीले रंग के कपड़े पहनने से बचने की मान्यता है.
दिवाली पर दीपक जलाने का सही तरीका: लक्ष्मी-गणेश पूजन के बाद घर के मुख्य दरवाजे, पूजा स्थल, आंगन, तुलसी के पास और घर के अन्य सुरक्षित स्थानों पर दीपक जलाएं. कई परिवारों में यम दीपदान और अन्य पारंपरिक दीपदान की अलग-अलग विधियां भी प्रचलित हैं. दीपक जलाते समय ध्यान रखें कि उन्हें पर्दों, कपड़ों और ज्वलनशील चीजों के पास न रखें. घी या तेल का दीपक सुरक्षित स्थान पर रखें और उसे जलता हुआ छोड़कर न जाएं.
















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