शुक्लागंज उन्नाव में जर्जर खंभे और टूटे नाले दे रहे बड़े हादसे को दावत, निकम्मे अफसर मूंदे आंख

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दानिश खान, शुक्लागंज (उन्नाव)।
गंगा घाट शुक्लागंज के प्रेम नगर, कृष्णा पब्लिक स्कूल के पास प्रशासनिक लापरवाही अब सामान्य उदासीनता नहीं, बल्कि खुली आपराधिक लापरवाही का रूप ले चुकी है. सड़क के कॉर्नर पर लगा बिजली का खंभा पूरी तरह गल चुका है, वहीं महज 10 मीटर की दूरी पर सीमेंट का दूसरा खंभा खतरनाक रूप से टेढ़ा होकर किसी भी वक्त गिर सकता है. यह स्थिति किसी बड़े हादसे की सीधी चेतावनी है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी बेशर्मी की हद तक चुप्पी साधे बैठे हैं.

सबसे गंभीर बात यह है कि इस जानलेवा खतरे की जानकारी पहले ही जेई अक्षय तिवारी व गोकुलबाबा पावरहाउस x c n को दी जा चुकी है, इसके बावजूद न तो निरीक्षण किया गया और न ही कोई कार्रवाई हुई. सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी मासूम की जान जाने का इंतज़ार कर रहा है, तभी फाइल खुलेगी? या फिर हादसे के बाद घिसे-पिटे बयान देकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ दिया जाएगा? इस मामले में अक्षय तिवारी को भी अवगत कराया गया, लेकिन उनकी निष्क्रियता ने लोगों के आक्रोश को और भड़का दिया है.

स्थानीय जनता में साफ चर्चा है कि शायद अधिकारियों को तब ही फुर्सत मिलेगी, जब कोई बड़ा हादसा अखबारों की सुर्खी बनेगा. इससे यह साफ हो जाता है कि अफसरों के लिए जनता की सुरक्षा प्राथमिकता नहीं, बल्कि बोझ बन चुकी है. इसी क्षेत्र में टूटा हुआ नाला प्रशासन की निकम्मेपन की एक और जिंदा मिसाल है. नाला महीनों से टूटा पड़ा है, लेकिन नगर पालिका ने आंख मूंदे रखी है. स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और राहगीरों के लिए यह नाला हर रोज खतरा बनकर खड़ा है. नगर पालिका की यह लापरवाही किसी भी समय बड़ी दुर्घटना में बदल सकती है.

वार्ड संख्या 3 और वार्ड संख्या 10 के सभासदों की भूमिका भी पूरी तरह संदिग्ध है. जनप्रतिनिधि होने के बावजूद न तो दबाव बनाया गया और न ही जनता की आवाज़ प्रशासन तक मजबूती से पहुंचाई गई. इससे यह सवाल उठता है कि क्या सभासद भी इस लापरवाही में मौन सहमति दे रहे हैं?

अब प्रशासन को यह समझ लेना चाहिए कि चेतावनी के बावजूद कार्रवाई न करना सीधा अपराध है. यदि किसी भी प्रकार की जनहानि होती है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी बिजली विभाग, नगर पालिका, एसडीएम कार्यालय, संबंधित अधिकारी और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की होगी. जनता अब हादसे के बाद कार्रवाई नहीं, बल्कि तुरंत ठोस कदम चाहती है. वरना यह लापरवाही इतिहास में प्रशासन की सबसे बड़ी नाकामी के रूप में दर्ज की जाएगी.

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