शराब घोटाला केस में दिल्ली कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को CBI केस में बरी कर दिया है. राउज एवेन्यू कोर्ट ने शुक्रवार को कहा- दोनों के खिलाफ बिना सबूत के आरोप साबित नहीं होता है.
कोर्ट के बाहर केजरीवाल ने मीडिया से बात की, इस दौरान वे रोने लगे, उन्होंने कहा…”जिस तरह से बीजेपी शराब घोटाला, शराब घोटाला कर रही थी. हमारे ऊपर आरोप लगा रही थी. आज कोर्ट ने हमें बरी कर दिया। हम हमेशा कहते थे सत्य की जीत होती है. भगवान हमारे साथ है. सत्य की जीत हुई. मोदी जी और अमित शाह जी ने यह सबसे बड़ा राजनीतिक षड्यंत्र रचा.”
आम आदमी पार्टी के टॉप 4 लीडर को जेल में डाल दिया. सिटिंग मुख्यमंत्री को जेल में डाल दिया. चौबीस घंटे खबरें दिखाई जाती थीं कि केजरीवाल भ्रष्ट है. मैंने जिंदगी में सिर्फ ईमानदारी कमाई. मैं प्रधानमंत्री जी से अपील करता हूं कि देश में इतनी समस्याएं हैं उन्हें दूर करके अच्छे काम करके सत्ता में आइए. दूसरों पर आरोप लगाना प्रधानमंत्री जी को शोभा नहीं देता. यह कहते हुए केजरीवाल रो पड़े.
केजरीवाल जमानत पर थे: अरविंद केजरीवाल शराब घोटाला केस में जमानत पर थे. वे 13 जुलाई, 2024 को जेल से बाहर आए थे. इसी दिन सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें इसी मामले से जुड़े CBI केस में जमानत दी थी. शराब घोटाला मामले में केजरीवाल के खिलाफ ED और CBI दोनों जांच एजेंसियों ने केस दर्ज किया था. ED ने उन्हें 21 मार्च, 2024 को अरेस्ट किया था. इसके बाद 26 जून को CBI ने जेल से ही उन्हें हिरासत में ले लिया था. ED मामले में उन्हें सुप्रीम कोर्ट से 12 जुलाई को जमानत मिली थी.
कोर्ट के बाहर मीडिया से बातचीत के दौरान केजरीवाल ने कहा- “आज सत्य की जीत हुई है. ये केस झूठा था. इसी दौरान केजरीवाल रोने लगे.
CAG की रिपोर्ट में दावा- शराब नीति में गड़बड़ियां थीं पिछले साल दिल्ली शराब नीति को लेकर CAG (कंप्ट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल ऑफ इंडिया) की रिपोर्ट लीक हुई थी. इसमें सरकार को 2026 करोड़ रुपए का रेवेन्यू लॉस होने की बात कही गई. रिपोर्ट में बताया गया है कि शराब नीति में काफी गड़बड़ियां थीं, जिनमें लाइसेंस देने में खामी भी शामिल है. इसके साथ ही AAP लीडर्स को कथित तौर पर घूस के जरिए फायदा पहुंचाया गया.
रिपोर्ट में बताया गया है कि डिप्टी चीफ मिनिस्टर जिस ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स की अगुआई कर रहे थे, उसने एक्सपर्ट पैनल के सुझावों को खारिज कर दिया था. कैबिनेट ने नीति को मंजूरी दे दी थी और कई अहम फैसलों पर तब के उपराज्यपाल की मंजूरी भी नहीं ली गई थी.
रिपोर्ट के मुताबिक, शिकायतों के बावजूद सभी को नीलामी की बोली लगाने की मंजूरी दे दी गई थी जिन्हें घाटा हुआ था, उन्हें भी लाइसेंस दे दिए गए या रीन्यू कर दिए गए थे.
















Leave a Reply