शीतला अष्‍टमी यानि बासौड़ा पर्व पर माता को लगाएं मीठे चावल का भोग, पाएं बीमारियों से निजात

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शीतला अष्‍टमी को बासौड़ा पर्व मनाते हैं, जिसके लिए एक दिन पहले से ही कई तैयारियां की जाती हैं. चूंकि शीतला अष्‍टमी के दिन माता को बासी भोजन का भोग लगाया जाता है इसलिए सप्‍तमी तिथि के दिन भोग तैयार किया जाता है. शीतला अष्‍टमी का व्रत करने वाले लोग मूंग की दाल का हलवा खाकर व्रत शुरू करते हैं. साथ ही सप्‍तमी को भी शीतला माता की पूजा की जाती है. इस बार 11 मार्च 2026 को शीतला अष्‍टमी है और 10 मार्च 2026 को शीतला सप्‍तमी मनाई जाएगी. शीतला सप्तमी की पूजा के लिए समय सुबह 6 बजकर 4 मिनट से शाम में 5 बजकर 56 मिनट तक है.

जानिए शीतला अष्‍टमी की पूजा के लिए सप्‍तमी को क्‍या-क्‍या भोग तैयार करें और भोग तैयार करने के लिए शुभ समय क्‍या है. ताकि शीतला अष्‍टमी की विधिवत पूजा करके शीतला माता से निरोगी काया का आशीर्वाद पाया जा सके.

शीतला माता के प्रिय भोग: चैत्र कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को शीतला सप्तमी और अगले दिन शीतला अष्‍टमी पर्व मनाते हैं. शीतला अष्‍टमी का व्रत और पूजा करने के लिए शीतला सप्‍तमी को विशेष रूप से गुड़ या गन्‍ने के रस में पके मीठे चावल का भोग लगाया जाता है. जिसे शीतला सप्‍तमी की दोपहर या शाम को बनाकर तैयार कर लें. अगले दिन शीतला माता की पूजा के बाद यही प्रसाद खाएं.

चूंकि शीतला अष्‍टमी के दिन चूल्‍हा नहीं जलता है और ठंडा-बासी भोजन ही खाया जाता है, लिहाजा इस दिन के लिए ऐसी चीजें तैयार की जाती हैं जो अगले दिन तक खराब ना हों. जैसे- पूरी, दही बड़े, सूखी सब्जियां आदि. शीतला अष्‍टमी के दिन पूजा के बाद घर के सभी लोग यही भोजन करते हैं. 

गर्मी की बीमारियों से मिलती है निजात: शीतला माता के नाम से ही जाहिर है कि वे शीतलता देने वाली देवी हैं. मान्‍यता है कि शीतला माता की पूजा करने से चेचक, बुखार और गर्मी के कारण होने वाली बीमारियों से बचाव होता है. साथ ही बासौड़ा पर्व इस बात का भी प्रतीक है इसके बाद गर्मी का मौसम शुरू हो जाता है, जिससे खाना जल्‍दी खराब होने लगता है. लिहाजा बासौड़ा के दिन आखिरी बार बासी खाना खाएं और इसके बाद गर्मियों में रोजाना ताजा बना व हल्‍का भोजन ही करें.

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