भारतीय झंडे वाले 2 एलपीजी टैंकर (पाइन गैस और जग वसंत) ने युद्ध प्रभावित होर्मुज स्ट्रेट को सुरक्षित पार कर लिया है. ये जहाज सोमवार सुबह फारस की खाड़ी से रवाना हुए और जहाज ट्रैकिंग डेटा के अनुसार ईरान के लारक व किश्म द्वीपों के बीच से गुजरे, ताकि ईरानी अधिकारियों को अपनी पहचान साफ कर सकें. इन दो जहाजों में कुल 92,000 टन एलपीजी है जो देश की लगभग एक दिन की खाना पकाने की गैस के बराबर है. पोर्ट्स, शिपिंग एंड वाटरवेज मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि इनका भारत पहुंचना अगले दो दिनों में संभावित है, क्योंकि खाड़ी से भारत तक सामान्यतः दो से ढाई दिन लगते हैं.
इससे पहले, एमटी शिवालिक और एमटी नंदा देवी गुजरात के मुंद्रा और कांडला बंदरगाह पहुंच चुके हैं. इनमें 92,712 टन एलपीजी लदा हुआ है. यह मूवमेंट युद्ध के बीच भारतीय जहाजों की निकासी की शुरुआत दर्शाता है. युद्ध शुरू होने पर होर्मुज जलडमरूमध्य में 28 भारतीय जहाज फंस गए थे, जिनमें से 24 पश्चिमी हिस्से में और 4 पूर्वी हिस्से में थे। हाल के दिनों में दोनों तरफ से कुछ जहाज सुरक्षित निकले हैं. वर्तमान में पश्चिमी हिस्से में 22 जहाज बचे हैं, जिनमें 600 नाविक सवार हैं। 11 नाविक भारत लौट चुके हैं. इनमें 7 एलपीजी कैरियर, एक एलएनजी टैंकर, 4 क्रूड ऑयल टैंकर, कंटेनर जहाज, बल्क कैरियर आदि शामिल हैं.
फंसे जहाजों की सुरक्षित निकालने की कोशिश: रिपोर्ट के मुताबिक, एक खाली जहाज को अब एलपीजी से लोड किया गया है. पाइन गैस और जग वसंत के निकलने के बाद पश्चिमी हिस्से में जहाजों की संख्या 20 रह जाएगी, जिसमें 5 एलपीजी कैरियर होंगे। ये जहाज मुख्य रूप से बीपीसीएल, एचपीसीएल, आईओसी, रिलायंस और अन्य कंपनियों से चार्टर किए गए हैं. भारत सरकार सभी फंसे जहाजों की सुरक्षित निकासी सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है. नाविकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। जहाजों पर भोजन व पीने के पानी की कोई कमी नहीं है.
फारस की खाड़ी में करीब 500 टैंकर जहाज फंसे: ईरान सत्यापन के बाद कुछ जहाजों को जाने की इजाजत दे रहा है, जिसमें जहाज की मालिकाना, कार्गो और अमेरिकी संबंध न होने की जांच की जाती है. कई जहाज लारक-किश्म चैनल से होकर निकले हैं, जो एक तरह की वेरिफिकेशन प्रक्रिया लगती है. कुल मिलाकर फारस की खाड़ी में करीब 500 टैंकर जहाज फंसे हुए हैं. भारत 88% क्रूड ऑयल, 50% प्राकृतिक गैस और 60% एलपीजी आयात करता है, जिसमें से अधिकांश होर्मुज स्ट्रेट से गुजरता है. युद्ध से पहले सऊदी अरब, इराक, यूएई आदि से आधे से अधिक क्रूड ऑयल इसी मार्ग से आता था, जबकि 85-95% एलपीजी भी इस रास्ते से सप्लाई होती थी.















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