इच्छामृत्यु की मांग करते हुए AIIMS में भर्ती गाजियाबाद के हरीश राणा का निधन हो गया है. वह भारत के पहले व्यक्ति थे, जिन्हें ‘पैसिव यूथेनेशिया’ की इजाजत दी गई थी. 13 साल से ज्यादा समय तक कोमा में रहने के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें 11 मार्च 2026 को इच्छामृत्यु इजाजत दी थी.
2013 की दुर्घटना ने बदल दी जिंदगी: हरीश राणा पंजाब विश्वविद्यालय में बीटेक के छात्र थे. वर्ष 2013 में चौथी मंजिल से गिरने के कारण उनके सिर में गंभीर चोट आई, जिसके बाद वे गहरे कोमा में चले गए. पिछले करीब 12 वर्षों से वे कृत्रिम पोषण और समय-समय पर ऑक्सीजन सपोर्ट के सहारे जीवन जी रहे थे.
हरीश राणा को 14 मार्च को गाजियाबाद स्थित उनके घर से दिल्ली के डॉ. बीआर आंबेडकर इंस्टीट्यूट रोटरी कैंसर अस्पताल के पेलिएटिव केयर यूनिट में भर्ती कराया गया था. इससे तीन दिन पहले, 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम आदेश जारी करते हुए उनकी स्थिति को देखते हुए निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी.
सम्मान के साथ जीवन समाप्त करने की प्रक्रिया: अस्पताल में भर्ती होने के बाद चिकित्सकीय दिशा-निर्देशों के तहत उनका न्यूट्रिशनल सपोर्ट धीरे-धीरे कम किया गया. सुप्रीम कोर्ट ने AIIMS को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था कि लाइफ सपोर्ट हटाने की प्रक्रिया एक तय प्रोटोकॉल के तहत और गरिमा के साथ पूरी की जाए.
इस जटिल प्रक्रिया के लिए डॉक्टर सीमा मिश्रा के नेतृत्व में एक विशेष मेडिकल टीम बनाई गई थी, जिसमें न्यूरोसर्जरी, एनेस्थीसिया, पेलिएटिव केयर और मनोचिकित्सा के विशेषज्ञ शामिल थे. इस तरह की समन्वित चिकित्सा प्रक्रिया भारत में पहली बार देखी गई, जो भविष्य में ऐसे मामलों के लिए एक दिशा तय कर सकती है.















Leave a Reply