यूपी की योगी कैबिनेट का आज दूसरी बार विस्तार हुआ. 2 कैबिनेट और 4 राज्यमंत्री मिलाकर 6 नए सदस्य शामिल हुए. वहीं 2 राज्य मंत्रियों को प्रमोशन देकर राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया.
राजभवन में रविवार को आयोजित समारोह में सबसे पहले भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी ने शपथ ली. इसके बाद सपा के बागी विधायक मनोज पांडेय ने शपथ ली. दोनों को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है.
तीसरे नंबर पर अजीत पाल और फिर सोमेंद्र तोमर ने शपथ ली. दोनों को प्रमोट कर राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया. इसके बाद कृष्णा पासवान, कैलाश राजपूत, सुरेंद्र दिलेर और हंसराज विश्वकर्मा ने राज्यमंत्री पद की शपथ ली.
कृष्णा पासवान पहले आंगनबाड़ी कार्यकर्ता थीं. नए बनने वाले मंत्रियों में 1 ब्राह्मण, 3 ओबीसी और 2 दलित वर्ग से हैं। शपथ के बाद अजीत पाल, सोमेंद्र तोमर, कृष्णा पासवान, कैलाश राजपूत, सुरेंद्र दिलेर और हंसराज ने राज्यपाल और सीएम के पैर छुए.
अब यूपी सरकार में योगी को मिलाकर कुल 60 मंत्री हैं. योगी मंत्रिमंडल का पहला विस्तार 2024 में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले 5 मार्च, 2024 को हुआ था.
मंत्री पद न मिलने से भाजपा विधायक नाराज: मंत्री पद न मिलने से नाराज भाजपा विधायक आशा मौर्या ने पार्टी पर अनदेखी का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि मौर्य समाज की अनदेखी की गई है. दलबदलू नेताओं को तवज्जो दी गई. आशा मौर्य सीतापुर में महमूदाबाद सीट से विधायक हैं.

पूर्व विधानसभा अध्यक्ष बोले- मनोज पांडेय की शपथ को चैलेंज नहीं कर सकती सपा मनोज पांडेय ने 2022 में सपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था. 2024 में राज्यसभा चुनाव के वक्त उन्होंने बगावत करते हुए भाजपा प्रत्याशी को वोट दिया था. इसके बाद सपा ने उन्हें पार्टी से निकाल दिया था.
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और नेता विपक्षी दल माता प्रसाद पांडेय कहते हैं- “क्योंकि मनोज पांडेय को पार्टी से निकाला जा चुका है. इसलिए उनके मंत्री पद की शपथ लेने को चुनौती नहीं दी जा सकती. अगर पार्टी ने निकाला न होता और वे मंत्री पद की शपथ लेते तो नियमों के विरुद्ध होता. पार्टी से निष्कासन के बाद कोई भी विधायक निर्दल विधायक की तरह माना जाता है.”

अखिलेश यादव ने उठाये सवाल: विपक्ष और खासकर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव चुनाव से कुछ महीने पहले हुए योगी कैबिनेट विस्तार पर कई सवाल उठा रहे हैं. वहीं बीजेपी के रणनीतिकार इसे बेहद जरूरी और अगले साल होने वाले चुनावों के मद्देनजर बेहद महत्वपूर्ण मान रहे हैं. यहां एक दिलचस्प बात शायद आपको याद न हो लेकिन उत्तर प्रदेश में यह पहला मौका नहीं है जब चुनाव के कुछ समय पहले बीजेपी ने कैबिनेट विस्तार किया है.
2022 में हुए विधानसभा चुनाव से कुछ समय पहले 2021 के सितम्बर महीने में भी भाजपा ने एक कैबिनेट विस्तार किया था. इस बार जहां योगी कैबिनेट में छह नए चेहरों को एंट्री देने के साथ दो सदस्यों का प्रमोशन कर राज्य मंत्री से स्वतंत्र प्रभार बनाया गया है वहीं सितम्बर 2021 में हुए कैबिनेट विस्तार में सात चेहरों को शामिल किया गया था. उनमें एक कैबिनेट और छह राज्य मंत्री शामिल थे. उसी विस्तार में जितिन प्रसाद यूपी में मंत्री बने थे.
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि भाजपा नेतृत्व मिशन 2027 की बिसात पर अपने उन रणनीतिक चेहरों को फिर से मुख्य भूमिका में ला रहा है जो क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों की काट ढूंढने में माहिर है. इस पूरी स्किप्ट के केंद्र में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी हैं जिनकी कैबिनेट में वापसी की संभावनाओं ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सियासी पारे को बढ़ा दिया है. वहीं योगी 2.0 के दूसरे कैबिनेट विस्तार में कैबिनेट मंत्री बनाए गए मनोज पांडेय को अवध और पूर्वांचल के क्षेत्र में बड़े ब्राह्मण नेता के तौर पर देखा जाता है. रायबरेली की ऊंचाहार सीट से 2022 का चुनाव सपा के टिकट पर जीतने वाले मनोज पांडेय यूपी विधानसभा में सपा के मुख्य सचेतक रह चुके हैं.
















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