UP के सरकारी अस्पतालों में अव्यस्थाओं और भ्रष्टाचार का यह आलम है कि गरीब आदमी से कोसों दूर इलाज है. जब-जब इस तरह के मामले सोशल मीडिया पर उछलते या उभरते है तो स्वास्थ्य विभाग के तिकड़मबाज डॉक्टर अधिकारी उसको जांच और जुमलेबाजी में दबा देते है. वीडियो में सच दिखने के बाद भी जिला अस्पताल एडीएसआईसी डॉ. आरसी शर्मा बोल रहे कि वीडियो की जानकारी मिली है.
फिर लीपापोती करते हुए बोले कि महिला मरीज के बारे में जानकारी करने पर पता चला कि वह तीन दिन से भर्ती थी. उसे डायबिटिज के साथ ही कई गंभीर बीमारी है. दो दिन से उसकी सांस फूल रही है. यहां हृदयरोग विशेषज्ञ नहीं होने की वजह से चिकित्सक ने बीते शुक्रवार को ही उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया था. शनिवार को सुबह उसके घरवाले बिना बताए इमरजेंसी वार्ड से लेकर चले गए. ठेले पर लेकर जाने की जानकारी नहीं है.
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने भी संज्ञान लिया है और जांच के आदेश दे दिए हैं. उन्होंने स्वास्थ्य महानिदेशक को निर्देशित किया है कि वह वरिष्ठ अधिकारी को मौके पर भेजकर पूरे प्रकरण की जांच कराएं. दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए. उन्होंने कहा कि मरीजों के इलाज में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. गरीब, असहाय और जरूरतमंद मरीजों की सेवा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है.
बस इसी जांच पर पेंच फंस जाता है और गुनहगार छूट जाता है. बेहतर होता कि डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक भुक्तभोगी से सीधी बात करके सच को पता करते और CM योगी स्टाइल में कड़ा एक्शन लेते तो महकमे में उसका कोई असर दिखता. संज्ञान, जांच और कार्रवाई जैसे जुमले तो कांग्रेस-सपा जैसी सरकारों में चलते थे, भाजपा सरकार में कतई नहीं.
CM योगी ने अपराधियों पर त्वरित कार्रवाई का जो तरीका अपनाया उसका असर दिख रहा है लेकिन अन्य विभाग अब भी उसी पुराने ढर्रे पर चल रहे है.
















Leave a Reply