योगी ने भदोही जिले का नाम बदला, अब ‘संत रविदास नगर भदोही’ के नाम से जाना जाएगा

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CM योगी ने रविवार को भदोही जिले का नाम बदल दिया. उन्होंने कहा- अब भदोही ‘संत रविदास नगर भदोही’ के नाम से जाना जाएगा. सीएम ने इससे पहले 29 जुलाई, 2026 को वाराणसी में भदोही का नाम ‘संत रविदास नगर’ करने की घोषणा की थी.

योगी ने संत रविदास के करीब 600 वर्ष पहले दिए संदेश का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने ऐसे राज की कामना की थी, जहां सबको अन्न मिले और बिना भेदभाव सभी साथ रहें. आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के 80 करोड़ से अधिक लोगों को मुफ्त राशन मिल रहा है.

भदोही का नाम 32 साल में 5वीं बार बदला गया है. 30 जून 1994 को मुलायम सिंह यादव की सरकार ने वाराणसी से अलग कर भदोही को नया जिला बनाया था. 4 दिसंबर 1997 को मायावती सरकार ने इसका नाम बदलकर ‘संत रविदास नगर’ कर दिया. इसके बाद 1999 में भाजपा सरकार के दौरान नाम ‘संत रविदास नगर भदोही’ किया गया. 2014 में अखिलेश यादव सरकार ने ‘संत रविदास नगर’ हटाकर जिले का नाम फिर ‘भदोही’ कर दिया था. अब योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर ‘संत रविदास नगर भदोही’ नाम की घोषणा की है.

50वें इंडिया कारपेट एक्सपो के गोल्डन जुबली संस्करण का सीएम योगी ने फीता काटकर शुभारंभ किया. इससे पहले उन्होंने 50वें इंडिया कारपेट एक्सपो के गोल्डन जुबली संस्करण का शुभारंभ किया. इस दौरान सीएम ने कहा कि भदोही, मिर्जापुर और वाराणसी का सिल्क-क्लस्टर सदियों से अपनी हस्तशिल्प परंपरा के लिए जाना जाता है. कारपेट एक्सपो इस विरासत को वैश्विक मंच देने का महत्वपूर्ण माध्यम है. एक्सपो के 50 वर्ष पूरे होने पर उन्होंने कारीगरों, हस्तशिल्पियों, निर्यातकों और विदेशी खरीदारों को बधाई दी.

सीएम ने कहा कि इस बार एक्सपो में 227 से अधिक एग्जीबिटर्स और 65 देशों के 450 से अधिक विदेशी खरीदार शामिल हो रहे हैं. 50वां इंडिया कारपेट एक्सपो 4 से 7 अक्टूबर तक कारपेट एक्सपो मार्ट में आयोजित किया जा रहा है. बोले- 2017 से पहले यूपी में थी हताशा और निराशा मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश के पास पहले भी असीम संभावनाएं थीं, लेकिन बीच के कालखंड में सरकारों की नीतियों के कारण प्रदेश की पहचान बीमारू राज्य के रूप में बन गई थी. कारीगर श्रमिक के रूप में अपनी पहचान छिपाने को मजबूर था, किसान आत्महत्या और नौजवान पलायन के लिए मजबूर था. उन्होंने कहा कि सुरक्षा का माहौल नहीं होने पर न कारीगर को काम मिलता है, न व्यापार बढ़ता है और न देश-विदेश के खरीदार आते हैं. 2017 के बाद सरकार ने सुरक्षा के साथ तकनीक, बाजार और कनेक्टिविटी पर काम किया है.

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