कानपुर नगर निगम मुख्यालय में बुधवार दोपहर दो बजे से शुरू हुई कार्यकारिणी की पूर्व में स्थगित बैठक हंगामे की भेंट चढ़ गई. बैठक की शुरुआत में ही उस वक्त असहज स्थिति पैदा हो गई जब सभागार में अधिवक्ताओं के बैठने को लेकर विवाद खड़ा हो गया.
महापौर प्रमिला पांडेय की ओर से कानूनी सलाह के लिए बुलाए गए दो अधिवक्ताओं की मौजूदगी पर नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने आपत्ति जता दी. उन्होंने स्पष्ट कहा कि बाहरी व्यक्तियों की मौजूदगी में कार्यकारिणी की बैठक नहीं हो सकती.
अधिवक्ताओं के बाहर नहीं जाने पर नगर आयुक्त बैठक छोड़कर चले गए. उनके साथ नगर निगम के अन्य अधिकारी भी बाहर निकल गए. इससे नाराज कुछ पार्षदों ने नगर आयुक्त के खिलाफ नारेबाजी की. अब कार्यकारिणी सदस्य उनके खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहे हैं. वहीं, महापौर ने नगर आयुक्त की शिकायत डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग (डीओपीटी) में करने की बात कही है.
इस बात पर नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय बुरी तरह बिफर पड़े और विरोध जताते हुए अपने अधिकारियों के साथ बैठक छोड़कर बाहर निकल गए. इस नाटकीय घटनाक्रम के बाद से निगम गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है और कार्यकारिणी सदस्यों द्वारा नगर आयुक्त के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाने की तैयारी की जा रही है.
बैठक में वकीलों की एंट्री पर विवाद: नगर निगम में बुधवार दोपहर करीब सवा दो बजे कार्यकारिणी की बैठक शुरू हुई. इस बैठक में महापौर की ओर से अधिवक्ता मोहम्मद जावेद और ऋषभ अवस्थी को भी बुलाया गया था. महापौर प्रमिला पांडेय ने नगर आयुक्त से पुरानी कार्यवृत्ति पर सवाल पूछा तो नगर आयुक्त ने कहा कि बाहरी लोगों के सामने कोई जवाब नहीं दिया जाएगा.
नगर आयुक्त ने आपत्ति जताते हुए कहा कि बाहरी व्यक्तियों की मौजूदगी में बैठक नहीं की जा सकती. उन्होंने अधिवक्ताओं के बाहर जाने तक बैठक शुरू नहीं करने की बात कही. दोनों अधिवक्ताओं के बाहर नहीं जाने पर नगर आयुक्त बैठक छोड़कर चले गए. इसके बाद अन्य अधिकारी भी उनके साथ निकल गए.
इन अहम मुद्दों पर होनी थी समीक्षा: विवाद से पहले बैठक में कई महत्वपूर्ण और जनहित से जुड़े मुद्दों पर चर्चा और समीक्षा की रूपरेखा तय की गई थी. इसमें मुख्य रूप से पिछले तीन वर्षों के घर-घर कूड़ा उठान कार्यों, नगर निगम निधि से स्वीकृत विकास कार्यों, निविदाओं, बजट आवंटन और व्यय के ब्योरे को आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक करने जैसे बिंदु शामिल थे.
कार्यकारिणी सदस्यों के तीखे तेवर देखने को मिले: इसके अलावा विभिन्न समितियों से पार्षदों को हटाए जाने के मामलों, स्थानीय निधि लेखापरीक्षा प्रतिवेदनों, मासिक आय-व्यय के प्रकाशन और वैधानिक प्रावधानों के अनुपालन की स्थिति पर भी मंथन किया जाना था. साथ ही एसआईट के गठन के आधार, उसके आदेश और अधिकार क्षेत्र को लेकर भी कार्यकारिणी सदस्यों के तीखे तेवर देखने को मिले.
















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