UGC के नए नियमों का विरोध जारी है. जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने भी यूजीसी के नए नियमों का विरोध किया है. उन्होंने कहा कि यूजीसी के नए नियमों को सरकार को वापस लेना ही होगा. इतना ही नहीं रामभद्राचार्य ने कहा कि उनके धर्माचार्य रहते हुए ये कानून लागू नहीं हो सकता. रामभद्राचार्य ने कहा कि UGC की क्या आवश्यकता थी?. समाज में क्यों भेदभाव किया जा रहा. सरकार को अगर गृहयुद्ध से बचना है तो इस कानून को वापस लेना ही होगा.
बस्ती में चल रही श्रीराम कथा: दरअसल, यूपी के बस्ती के कप्तानगंज के बढ़नी गांव में रामभद्राचार्य की श्रीराम कथा चल रही है. इस दौरान रामभद्राचार्य ने जातिवाद के मुद्दे पर सरकार को घेरा. रामभद्राचार्य ने कहा कि ब्राह्मण कभी भी जातिवादी नहीं रहा है. महाभारत के उदाहरण से उन्होंने दिखाया कि अगर द्रोणाचार्य ने कर्ण को शिक्षा देने से नहीं रोका होता, तो संभवतः युद्ध टल सकता था. उन्होंने कहा कि दुर्भाग्यवश कई ब्राह्मण मांस और मछली खाने लगे हैं. शराब का भी सेवन करते हैं. ऐसे ब्राह्मणों को स्वयं जागरूक होना होगा.
बस्ती का नाम बदलने की मांग: इस दौरान रामभद्राचार्य ने बस्ती का नाम बदलकर वशिष्ठ नगर करने की भी मांग की. उन्होंने कहा कि यहां के बढ़नी मिश्र गांव की अपनी अध्यात्मिक विशेषता है. गुरु वशिष्ठ ने निषाद राज को आदर किया था. अगर द्रोणाचार्य ने कर्ण को शिक्षा देने से इनकार नहीं किया होता तो महाभारत नहीं होता. उन्होंने कहा कि गुरु वशिष्ठ ने सिर्फ राजकुमारों को ही नहीं सभी वर्गों को शिक्षा दी थी. उन्होंने कहा कि जो रामजी का है वो सभी का है.
अलंकार अग्निहोत्री ने दे दिया था इस्तीफा: बता दें कि यूजीसी के नए नियमों का विरोध करते हुए बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. वहीं, सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया था. इसके बाद अलंकार अग्निहोत्री प्रदेशभर में घूम घूमकर यूजीसी के नए नियमों का विरोध कर रहे हैं. साथ ही इसे वापस लेने की मांग कर रहे हैं. अलंकार अग्निहोत्री ने अपनी नई पार्टी बनाने का भी ऐलान किया है.
















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