पुनीत शुक्ला, कानपुर।
फर्जी डिग्री और मार्कशीट मामले में SIT ने दो और आरोपियों को अरेस्ट कर लिया है. हैदराबाद के तेलंगाना निवासी फर्जी डॉक्टर मनीष कुमार और उसके साथी कोचिंग संचालक उन्नाव निवासी अर्जुन यादव को पकड़ा है. आरोपी डॉक्टर अब तक हाईस्कूल से लेकर ग्रेजुएशन तक की तक की तकरीबन 65 से 70 मार्कशीट बनवा चूका है.
मजे की बात कि मुख्य आरोपी मनीष कुमार खुद मात्र 12वीं पास है, लेकिन उसने ‘ग्लोबल ह्यूमन पीस वर्चुअल यूनिवर्सिटी USA’ (चेन्नई) से डॉक्टरेट की फर्जी उपाधि ले रखी थी.
आरोपी तेलांगना यूनिवर्सिटी से अटैच कुमायुं यूनिवसिर्टी गढवाल और फरीदाबाद की लिंग्या यूनिवर्सिटी से प्रोफेशनल डिग्री और माइग्रेशन सर्टिफिकेट बनवाने का काम करता था.
पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने घटना का खुलासा करते हुए बताया कि अब तक की जांच में गिरोह का सरगना फर्जी डॉक्टर निकल कर आया है.
आरोपी डॉक्टर ने विदेश तक अपनी पहुंच बनाने के लिए चार बार ग्लोबल बुक ऑफ एक्सीलेंस अवार्ड कराया, जिसमें 60 सेलिब्रिटी को पुरस्कृत किया है. अभिनेता सोनू सूद, करन मेहरा, अभिनेत्री हिना खान, कथावाचक जया किशोरी, फिल्म डायरेक्टर योगेश भारती समेत कई सेलिब्रिटी की फोटो आरोपी मनीष के साथ मिली है. इसके साथ ही आरोपियों के पास से प्रधानमंत्री कार्यालय का एक लेटर भी मिला है.

अभिनेता सोनू सूद समेत अन्य सेलिब्रिटी के साथ आरोपी मनीष.
18 फरवरी को पुलिस ने गिरोह का किया था खुलासा: पुलिस कमिश्नर ने घटना को खुलासा करते हुए बताया कि 18 फरवरी को किदवई नगर पुलिस ने जूही गौशाला चौराहे के पास शैल ग्रुप ऑफ एजुकेशन के कार्यालय में दबिश दी थी। कार्यालय से पुलिस ने 14 विश्वविद्यालयों और उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद, प्रयागराज की एक हजार से ज्यादा मार्कशीट और डिग्री बरामद की थीं। इनमें बीटेक, एमटेक, बीफार्मा, डीफार्मा, एलएलबी आदि की डिग्री शामिल थीं।
पुलिस ने मौके से चार आरोपियों को भी गिरफ्तार किया था। यह लोग वर्ष 2012 से डिग्रियां, माइग्रेशन और मार्कशीट बनवाने का काम कर रहे थे। गिरोह का मास्टरमाइंड शैलेंद्र कुमार ओझा था। पुलिस गिरोह में शामिल शैलेंद्र, नागेश मणि त्रिपाठी, जोगेंद्र, अश्वनी कुमार सिंह और विनीत को भी गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।
पुलिस कमिश्नर ने बताया कि आरोपी मनीष, अर्जुन और शैलेंद्र के खातों का लेनदेन, वॉट्सऐप मैसेज, मोबाइल डिटेल सामने आई थी। इसके बाद मनीष और अर्जुन की तलाश की जा रही थी।
छापेमारी के समय दुबई में था मनीष: 18 फरवरी को छापेमारी के समय मनीष दुबई में था, मार्च में वह हैदराबाद आया। इसके बाद से वह फरार चल रहा था। फरारी के दौरान मनीष पुणे, गोवा, बेंगलुरु, दिल्ली, फरीदाबाद में ठिकाने बदल रहा था। इसके बाद SIT की टीम ने उसे यशदेा नगर स्थित शनिदेव चौराहे के पास से अरेस्ट कर लिया।
मनीष मूलरूप से राजस्थान जिले के सीकर का रहने वाला है। वह इंटर पास है, राजस्थान में रहने के बाद वह कुछ समय बिहार, दरभंगा में रहा उसके बाद बीडीएस का कोर्स करने के लिए बेंगलुरु चला गया।
BDS में फेल होने के बाद चेन्नई से ली डॉक्टरेट की उपाधि: BDS यानी बैचलर ऑफ डेंटल सर्जरी में फेल होने के बाद 2025 से नारायणगुणा हैदराबाद में रहा। इस दौरान उसने चेन्नई की ग्लोबल ह्यूमन पीस यूनिवर्सिटी से डॉक्टरेट की उपाधि हासिल किया। इसके बाद वह गिरोह में शामिल हो गया था।
पुलिस कमिश्नर ने बताया कि वह हाईस्कूल से लेकर ग्रेजुएशन तक की डिग्रियां मुहैया कराता था। साथ ही लिंग्या और कुमायुं यूनिवर्सिटी से प्रोफेशनल डिग्रियां और माइग्रेशन सर्टिफिकेट मुहैया कराता था।
मनीष और शैलेंद्र के खाते में 16.44 लाख का ट्रांजेक्शन मिला है। साथ ही अर्जुन यादव ने करीब 20 लाख रुपए मनीष के खाते में भेजे। इसके साथ ही मनीष और शैलेंद्र के बीच फोन पर हुई बातचीत के रिकॉर्ड भी पुलिस को मिले है।
पुलिस कमिश्नर ने बताया कि शैलेंद्र की गिरफ्तारी के बाद भी मनीष ने उसके खाते में रकम ट्रांसफर की थी। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह 2019 से गिरोह में जुड़ा था। वह कानपुर के शेखर गुप्ता के संपर्क में आया। इसके बाद उसने फर्जी डिग्री और मार्कशीट मुहैया कराने का काम शुरू किया।
उसने बताया कि शेखर गुप्ता के जरिए वॉट्सऐप पर डिमांड भेजी जाती थी। इसके बाद वह इंदौर के संजय पंजानी के प्रिंटिंग प्रेस से फर्जी डिग्री बनवाता था। फर्जी डिग्री मुहैया कराने में उसे 15 हजार रुपए मिलते थे। अब पुलिस शेखर और संजय पंजानी की तलाश में जुटी है।
स्पेशल बच्चों के लिए ऑनलाइन क्लासेज की फ्रेंचाइजी देता था अर्जुन: पुलिस कमिश्नर ने बताया- अर्जुन ने शहर के करीब 5 इंस्टीट्यूट में स्पेशल बच्चों के लिए मॉरीशस की कंपनी लर्निंग पाथ्स और आरोपी मनीष के नाम रजिस्टर्ड अल्मा किड्स की फ्रेंचाइजी ले रखी थी, जिसमें वह स्पेशल बच्चों को टीचरों के जरिए ट्रेनिंग दिलवाता था।
लर्निंग पाथ्स कंपनी बंद होने के बाद भी अर्जुन शहर में अवैध रूप से क्लासेज संचालित करा रहा था। मनीष ने अल्मा किड्स को बंद कर दिया था, हालांकि अर्जुन फर्जी शिक्षकों के जरिए इसे भी संचालित कर रहा था।
विभिन्न राज्यों में चार अवार्ड फंक्शन करा चुका है आरोपी: मनीष समाज सेवा, शिक्षा, चिकित्सा के क्षेत्र में उत्कृष्ट काम करने वाली लंदन की ग्लोबल बुक ऑफ एक्सीलेंस अवॉर्ड संस्था के जरिए लोगों को सम्मानित करने का भी काम करता था। उसने बेंगलुरु में एक, मुंबई में 2 और गोवा में एक अवॉर्ड फंक्शन कराया था, जिसमें देश के तकरीबन 60 सेलिब्रिटी को भी सम्मानित किया गया था।
इसके साथ ही उसने नेपाल के भी कुछ लोगों को अवार्ड दिया है। इस अवार्ड फंक्शन के जरिए मनीष अपनी पहुंच विदेश तक ले जाना चाहता था, हाल ही में वह दुबई में भी एक अवॉर्ड फंक्शन आयोजित कराने वाला था, लेकिन फंडिंग न होने की वजह से अवार्ड फंक्शन टालना पड़ा।
पुलिस की पूछताछ में मनीष ने बताया कि कानपुर के शेखर गुप्ता का काम छत्रपति साहूजी महाराज यूनिवर्सिटी से डिग्रियां और सर्टिफिकेट मुहैया कराना था। वहीं, संजय पंजानी ने एक वेबसाइट बना रखी है, जिसमें फर्जी डिग्रियां, मार्कशीट और माइग्रेशन सर्टिफिकेट ऑनलाइन अपलोड किए जाते हैं। लिंग्याज यूनिवर्सिटी ने संजय के खिलाफ पहले भी मुकदमा दर्ज कराया था।
















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