होलिका की धधकती आग, लाठी लेकर चिल्लाते लोग, 25 फीट ऊंची लपटें, तभी सिर पर गमछा और गले में रुद्राक्ष की माला पहने संजू पंडा नाम का शख्स वहां पहुंचता है. वह धधकती आग के बीच से दौड़ता हुआ गुजरता है.
बीच में अग्नि देवता को प्रणाम करता है, फिर कुछ सेकेंड में ही जलती होलिका को पार कर जाता है. उफ तक नहीं करता, शरीर बिल्कुल नहीं झुलसता. यह दृश्य मथुरा में मंगलवार सुबह 4 बजे दिखा. जिसने भी यह नजारा देखा, वो हैरान रह गया. देश-विदेश के 50 हजार से ज्यादा लोग बांके-बिहारी की जय का उद्घोष करने लगे.
करीब 5200 साल पुरानी यह परंपरा जिला मुख्यालय से 50 किमी दूर फालैन गांव में होलिका दहन की रात मनाई जाती है. मान्यता है कि हिरण्यकश्यप की बहन होलिका ने भक्त प्रह्लाद को जलाने का प्रयास किया था, लेकिन वह ऐसा नहीं कर पाई थी. दूसरी बार संजू पंडा धधकती आग के बीच से निकला है। इससे पहले, संजू के बड़े भाई मोनू पंडा इस परंपरा को निभाते रहे हैं.

संजू पंडा ने बताया- “मैं बिल्कुल ठीक हूं. सब प्रह्लाद जी की कृपा है, सब उन्हीं का चमत्कार है. 45 दिनों तक ठाकुर जी की सेवा की. बताशा और घी से हमारा हवन चलता है. हमारी बहन पहले होलिका पर दूध से धार देती है. इसके बाद हम आग से निकलते हैं. प्रह्लादजी बाल रूप में साक्षात हमारे साथ होते हैं.”















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