हर महीने में दो प्रदोष व्रत आते हैं एक कृष्ण पक्ष और दूसरा शुक्ल पक्ष में आता है. प्रदोष व्रत में माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा की जाती है. मान्यता है कि प्रदोष व्रत करने से व्यक्ति के जीवन में आ रही बाधाएं दूर होती है. साथ ही सुख समृद्धि भी बनी रहती है. प्रदोष व्रत में प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने का विशेष महत्व बताया गया है. मान्यता है कि इस व्रत को करने से अधूरी इच्छाएं पूरी हो जाती है. आइए जानते हैं मई महीने के पहला प्रदोष व्रत कब रखा जाएगा. जानें तारीख, महत्व और पूजा विधि.
मई 2026 का पहला प्रदोष व्रत कब ? पंचांग की गणना के अनुसार, मई महीने का पहला प्रदोष व्रत गुरुवार 14 मई को रखा जाएगा. इस दिन गुरुवार होने के कारण यह गुरु प्रदोष व्रत कहलाएगा. पंचांग की गणना के अनुसार, त्रयोदशी तिथि का आरंभ 14 मई को सुबह में 11 बजकर 20 मिनट पर होगा और 15 मई को सुबह में 8 बजकर 31 मिनट तक त्रयोदशी तिथि रहेगी. ऐसे में प्रदोष व्रत 14 तारीख को ही करना शास्त्र सम्मत है. शास्त्रों के अनुसार, शाम के समय जब भी त्रयोदशी तिथि रहती है तो उस दिन ही प्रदोष व्रत किया जाता है. इसलिए 14 तारीख को ही गुरु प्रदोष व्रत रखा जाएगा.
प्रदोष व्रत में किन नियमों का पालन करना चाहिए ?
➤प्रदोष व्रत के दिन ब्रह्मचर्य का पालन जरूर करें. ऐसा करने से व्रत करने वालों को पूर्ण फल मिलता है
➤इस दिन सात्विक भोजन करें। लहसुन, प्याज जैसे तामसिक भोजन से थोड़ा परहेज करें.
➤इस दिन किसी के साथ भी वाद विवाद न करें. साथ ही मन में कोई भी नकारात्मक विचार न लेकर आएं.
➤इस दिन भगवान शिव की आराधना करते हुए अपना समय व्यतीत करें.
➤शाम में पूजा के बाद घर परिवार के सभी लोगों को प्रसाद वितरित करें.
प्रदोष व्रत का महत्व: शास्त्रों के अनुसार, प्रदोष काल में भगवान शिव कैलाश पर्वत पर नृत्य करते हैं. इसलिए प्रदोष व्रत में प्रदोष काल में पूजा का महत्व है. इस दिन किए पूजा-अर्चना से शीघ्र फल मिलता है और कामना पूर्ति होती है. प्रदोष व्रत स जातकों को न केवल आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है, बल्कि इससे जीवन की समस्याएं भी दूर होती हैं. प्रदोष व्रत की पूजा और व्रत को ऋण, शत्रु बाधा, ग्रह दोष मुक्ति के लिए भी फलदायी माना गया है.
















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