पुनीत शुक्ला, कानपुर।
कानपुर जेल में बंद जुड़वा बेटियों के हत्यारोपी शशिरंजन मिश्रा ने रविवार को जेल में अपनी गर्दन रेतकर सुसाइड का प्रयास किया। बंदियों ने उसे तड़पते देखा और जेल प्रशासन को जानकारी दी. इसके बाद उसे इलाज के लिए उर्सला अस्पताल में एडमिट कराया गया है. डॉक्टरों की मानें तो शशिरंजन की हालत खतरे से बाहर है. लेकिन उसे बेहतर इलाज के लिए हैलट रेफर कर दिया गया है. जेल प्रशासन इस मामले की जांच में जुटा है.
थाली को साफ करने के बहाने जमीन पर रगड़कर बनाया धारदार: कानपुर के किदवई नगर मिक्की हाउस के पीछे त्रिमूर्ति अपार्टमेंट में रहने वाला दवा व्यापारी शशि रंजन मिश्रा ने 19 अप्रैल की रात को अपनी 11 साल की जुड़वा बेटियों की गर्दन रेतकर हत्या कर दी थी. इसके बाद खुद सुसाइड करने की हिम्मत नहीं जुटा सका और पुलिस को सूचना देकर आत्मसमर्पण कर दिया था. इसके बाद से आरोपी शशिरंजन मिश्रा कानपुर जेल में बंद है. रविवार दोपहर को शशिरंजन मिश्रा ने थाली से अपनी गर्दन रेतकर सुसाइड का प्रयास किया, लेकिन वहां मौजूद कैदियों की नजर उसपर पर पड़ गई और उसे दबोच लिया.

सूचना पर जेल प्रबंधन ने उसे उर्सला अस्पताल में एडमिट कराया. अस्पताल में शशिरंजन ने बताया कि उसे कुछ पता नहीं है कि उसके साथ क्या हुआ है. वह डिप्रेशन का मरीज है और उसका जेल में इलाज नहीं चल रहा है. इसी वजह से उसके साथ ही घटना हुई है. प्राथमिक इलाज के बाद शशिरंजन को बेहतर इलाज के लिए हैलट रेफर कर दिया गया. डॉक्टरों ने जांच के बाद शशिरंजन की हालत खतरे से बाहर बताई है.
जेल अधीक्षक ने बताया कि शातिर शशिरंजन बेटियों की हत्या करने के बाद से डिप्रेशन में है. वह जेल में अपनी थाली को साफ करने के बहाने रोजाना जमीन पर रगड़कर धार लगा रहा था. कई दिनों तक धार लगाने के बाद रविवार को उसने जेल के बाथरूम में जाकर अपनी गर्दन रेतकर सुसाइड का प्रयास किया. गर्दन रेतने के दौरान उसके चीखने की आवज सुनकर अन्य कैदी दौड़े तो मामले की जानकारी हुई. इसके बाद उसे इलाज के लिए उर्सला में एडमिट कराया है. जहां पर डॉक्टरों ने उसकी हालत खतरे से बाहर बताई है.
उर्सला अस्पताल में एडमिट शशिरंजन मिश्रा.
बोला…प्रताड़ना से तंग होकर बेटियों को मार डाला: शशिरंजन ने बताया कि सोसायटी में रहने वाले जोगिन्दर सिंह और बीडी दीक्षित उसे परेशान करते थे. जोगिन्दर सिंह 12 लाख और बीडी दीक्षित 5 लाख रुपए उसका हड़प लिया है. फ्लैट बेचने के नाम पर उससे रकम ली और हड़प लिया था, वह फ्लैट छोड़ना चाहता था, लेकिन उसे छोड़ने नहीं दिया जा रहा था. मेरा पैसा भी वापस नहीं कर रहे हैं. इतना ही नहीं मुझे और बेटियों को गाली-गलौज करते थे. मेरा जीवन नरक बना दिया था. मैं डिप्रेशन का मरीज हूं. मुझे डिप्रेशन का दौरा आता है, जेल में इसका इलाज चल नहीं रहा है.
यह घटना भी डिप्रेशन के दौरे की वजह से हुई है. मुझे पता ही नहीं चला कि क्या हो रहा है क्या नहीं हो रहा है. मुझे लगा कि सर से कुछ आवाज आ रहा है. मुझे बहुत सारे लोग घेरे हुए हैं. बहुत तेज-तेज आवाज आ रही थी. मैं डिप्रेशन में हूं.
















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