आज सावन का तीसरा मंगला गौरी व्रत है. धार्मिक शास्त्रों के अनुसार, हर साल सावन मास में पड़ने वाले सभी मंगलवार के दिन मंगला गौरी व्रत रखा जाता है. श्रावण मास की तरह ही इस मंगला गौरी व्रत का महत्व माना गया है. यह व्रत माता पार्वती यानी गौरी को प्रसन्न करने लिए किया जाता है. यह सुख-सौभाग्य से जुड़ा होने के कारण इसे विवाहित महिलाएं करती हैं. अगर मंगल दोष समस्या दे रहा हो तो इस दिन की पूजा लाभदायी होती है.
हिंदू पंचांग के अनुसार 6 अगस्त को सावन का तीसरा मंगला गौरी व्रत रखा जाएगा. मान्यता है कि इस दिन व्रत करने से सुहागिन महिलाओं को मां पार्वती का आशीर्वाद मिलता है. आप भी वैवाहिक जीवन को सुखमय बनाना चाहते हैं, तो मंगला गौरी व्रत के पूजन के दौरान कृत पार्वती स्तोत्र का पाठ करें. इससे जल्द ही शुभ फलों की प्राप्ति होती है.
शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसा तीसरा मंगला गौरी व्रत शुक्ल पक्ष क द्वितीया तिथि 6 अगस्त के दिन रखा जाएगा. पंचांग के अनुसार शुक्ल पक्ष की द्वितीया पर ब्रह्म मुहूर्त 04 बजकर 21 मिनट से लेकर 05 बजकर 03 मिनट कर रहेगा. वहीं, अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजे से लेकर 12 बजकर 53 मिनट तक रहेगा.
मां मंगला गौरी की पूजा
सावन के तीसरे मंगलवार को माता मंगला गौरी की विधिवत पूजा से उनका आशीर्वाद प्राप्ता होता है. इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहन लें. इसके बाद हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प करें. फिर मंदिर की साफ-सफाई करें और एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर देवी पार्वती, भोले शंकर और गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करें.
इसके बाद देवी को फल, फूल, मिठाई आदि अर्पित करें. मां पार्वती को सिंदूर का तिलक लगाएं और उनके सामने घी का दीपक प्रज्वलित करें. अब लाल चूड़ियां, लाल बिंदी, लाल चुनरी, मेहंदी आदि सुहाग का सामान अर्पित करें और फिर व्रत की कथा सुनें. पूजा के दौरान मां मंगला गौरी से सौभाग्य की प्रार्थना करें.
उपाय
यदि आपका विवाह मंगल दोष या अन्य कारणों से नहीं हो रहा है, वो मां पार्वती और भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करें. पूजा में मंगला गौरी के चमत्कारी मंत्र ‘ॐ गौरीशंकराय नमः’ का 108 बार जाप करें. पूजा के बाद मां गौरी के चरणों में सिंदूर चढ़ाएं और उसका तिलक अपने माथे पर लगा लें. इस उपाय को करने से शीघ्र विवाह के योग बनने लगते हैं.
मंगला गौरी व्रत के चमत्कारी मंत्र
सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते।। ॐ उमामहेश्वराय नम: ह्रीं मंगले गौरि विवाहबाधां नाशय स्वाहा ।।
जानकी कृत पार्वती स्तोत्र
”जानकी उवाच”
शक्तिस्वरूपे सर्वेषां सर्वाधारे गुणाश्रये।
सदा शंकरयुक्ते च पतिं देहि नमोsस्तु ते।।
सृष्टिस्थित्यन्त रूपेण सृष्टिस्थित्यन्त रूपिणी।
सृष्टिस्थियन्त बीजानां बीजरूपे नमोsस्तु ते।।
हे गौरि पतिमर्मज्ञे पतिव्रतपरायणे।
पतिव्रते पतिरते पतिं देहि नमोsस्तु ते।।
सर्वमंगल मंगल्ये सर्वमंगल संयुते।
सर्वमंगल बीजे च नमस्ते सर्वमंगले।।
सर्वप्रिये सर्वबीजे सर्व अशुभ विनाशिनी।
सर्वेशे सर्वजनके नमस्ते शंकरप्रिये।।
परमात्मस्वरूपे च नित्यरूपे सनातनि।
साकारे च निराकारे सर्वरूपे नमोsस्तु ते।।
क्षुत् तृष्णेच्छा दया श्रद्धा निद्रा तन्द्रा स्मृति: क्षमा।
एतास्तव कला: सर्वा: नारायणि नमोsस्तु ते।।
लज्जा मेधा तुष्टि पुष्टि शान्ति संपत्ति वृद्धय:।
एतास्त्व कला: सर्वा: सर्वरूपे नमोsस्तु ते।।
दृष्टादृष्ट स्वरूपे च तयोर्बीज फलप्रदे ।
सर्वानिर्वचनीये च महामाये नमोsस्तु ते।।
शिवे शंकर सौभाग्ययुक्ते सौभाग्यदायिनि।
हरिं कान्तं च सौभाग्यं देहि देवी नमोsस्तु ते।।
फलश्रुति
स्तोत्रणानेन या: स्तुत्वा समाप्ति दिवसे शिवाम्।
नमन्ति परया भक्त्या ता लभन्ति हरिं पतिम्।।
इह कान्तसुखं भुक्त्वा पतिं प्राप्य परात्परम्।
दिव्यं स्यन्दनमारुह्य यान्त्यन्ते कृष्णसंनिधिम्।।
।।श्री ब्रह्मवैवर्त पुराणे जानकीकृतं पार्वतीस्तोत्रं सम्पूर्णम्।।
गौरी मंत्र
ॐ देवी महागौर्यै नमः।।
ध्यान मंत्र
वन्दे वाञ्छित कामार्थे चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
सिंहारूढा चतुर्भुजा महागौरी यशस्विनीम्।।
पूर्णन्दु निभाम् गौरी सोमचक्रस्थिताम् अष्टमम् महागौरी त्रिनेत्राम्।
वराभीतिकरां त्रिशूल डमरूधरां महागौरी भजेम्।।
पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानालङ्कार भूषिताम्।
मञ्जीर, हार, केयूर, किङ्किणि, रत्नकुण्डल मण्डिताम्।।
प्रफुल्ल वन्दना पल्लवाधरां कान्त कपोलाम् त्रैलोक्य मोहनम्।
कमनीयां लावण्यां मृणालां चन्दन गन्धलिप्ताम्।
















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