‘घूसखोर पंडत’ रिलीज हुई तो फूके जाएंगे सिनेमा घर, अभिनेताओं को दौड़ा-दौड़ा कर जूतों से पीटेंगे

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‘घूसखोर पंडत’ वेब सिरीज को लेकर विरोध बढ़ता जा रहा है. कानपुर पहुंचे हरिद्वार जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी यतींद्रानंद गिरी महाराज ने भी इस वेब सिरीज का विरोध किया है. उन्होंने कहा कि इसके निर्माता और एक्टर जहां भी जाएं उन्हें जूतों की माला से स्वागत करना चाहिए.

इतना ही नहीं यह भी कहा कि किसी भी सूरत में इस वेब-सिरीज इसको रिलीज नहीं होने देंगे, अगर हमको सिनेमाघरों में आग लगानी पड़ी तो आग लगाएंगे. इसके अभिनेताओं को दौड़ा-दौड़ा कर पीटेंगे। इसके साथ ही उन्होंने अन्य मामलों में भी अपनी बात रखी.

बॉलीवुड में अंडरवर्ल्ड का पैसा और सनातन धर्म की खिल्ली उड़ाने का आरोप: स्वामी यतींद्रानंद गिरी महाराज ने कहा- देश का दुर्भाग्य है, ये बॉलीवुड नाम की संस्था जो पहले नौटंकियां करते थे. जबसे ये बनी है, अंडवर्ल्ड का इसमें पैसा रहता है. ये लोग निरंतर सनातन धर्म की खिल्ली और मजाक उड़ाते और अपमान करते हैं. अब समाज का जो श्रेष्ठतम वर्ग जिसने अपने समर्पण और त्याग से समाज को खड़ा किया है.

ऐसे ब्राम्हण पर अब ये आक्षेप लग रहे हैं. इससे बड़ी मूर्खता क्या होगी. इसका कड़ा विरोध होना चाहिए और इस वेबसिरीज पर प्रतिबंध लगाना चाहिए. सेंसर बोर्ड की जिम्मेदारी है कि समाज में अच्छी चीज जानी चाहिए. समाज को बांटने वाली या समाज में उपद्रव फैलाने वाली नहीं जानी चाहिए. हिंसा-बलात्कार नहीं जाने चाहिए.

सेंसर बोर्ड के सदस्य जो भांग खाए पड़े हैं. उनके खिलाफ भी एक्शन होना चाहिए. उन्हें सस्पेंड कर देना चाहिए. अगर ये बेब सिरीज रिलीज की गई तो निश्चित रूप से सिनेमाघरों में आग लगाई जाएगी. इस फिल्म के निर्माता और अभिनता को सड़क पर दौड़ा-दौड़ा कर मारना चाहिए और जूतों की माला पहनाकर स्वागत करना चहिए, मारना चाहिए.

अविमुक्तेश्वरानंद पर कहा कि उन्हें पालकी में सवार होकर नहीं जाना चाहिए: उन्होंने बहुत मुखर होकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज के विवाद पर कहा कि स्वामी जी को पालकी में सवार होकर वहां नहीं जाना चाहिए था. मैं इसके विरोध में हूं, लेकिन पुलिस-प्रशासन ने जो कुछ भी उनके साथ किया वह भी नहीं होना चाहिए था. उसका भी मैं विरोध करता हूं.

यूजीसी बिल पर उन्होंने कहा कि मुझे सरकार पर भी संशय हो रहा है कि वह यूजीसी जैसे बिल ला रहे हैं. हमारा हिंदू संस्कृति कभी जातियों में नहीं बंटा था. यह देश का दुर्भाग्य कि हम यूजीसी जैसे कानून ला रहे हैं. इसकी कौन मांग कर रहा है. .

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