पुनीत शुक्ला, कानपुर।
कानपुर के लेम्बोर्गिनी केस में बुधवार को बड़ा यूटर्न आया. तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा के कथित ड्राइवर ने बुधवार दोपहर कानपुर कोर्ट में सरेंडर कर दिया. हालांकि, कोर्ट ने ड्राइवर मोहन की अर्जी खारिज कर दी, उसे आरोपी नहीं माना. कोर्ट ने कहा कि पुलिस रिपोर्ट में आरोपी शिवम है, मोहन का कहीं नाम नहीं है. कार अभी थाने में ही रहेगी.
इससे पहले ड्राइवर मोहन अपने वकील नरेंद्र कुमार यादव के साथ कोर्ट पहुंचा. मोहन ने कहा कि शिवम मिश्रा की गाड़ी मैं ही चला रहा था. शिवम को दौरा पड़ गया था. उस वक्त मैं घबरा गया और मुझे कुछ समझ में नहीं आया. उसी वक्त हादसा हो गया। जब शीशा तोड़ा और दरवाजा खोला गया, तो मैं नीचे से निकल गया था. बाउंसर ने शिवम को निकाला था. हादसे के बाद मैं कोने में खड़ा हो गया था. शिवम को दूसरी गाड़ी में ले जाया गया था. वहीं, वकील नरेंद्र कुमार यादव ने कहा- घायल और मुकदमा दर्ज कराने वाले वादी मो. तौसीफ ने ड्राइवर के साथ समझौता किया है. वादी ने पहचान की है कि गाड़ी मोहन ही चला रहा था. वादी ने कहा है कि वह इस केस में आगे कोई कार्रवाई नहीं चाहता.
जिला शासकीय अधिवक्ता दिलीप अवस्थी ने कहा- आरोपी शिवम मिश्रा की ओर से उनके वकील ने जब्त लेम्बोर्गिनी कार को रिलीज कराने के लिए अर्जी दाखिल की गई. सुनवाई के दौरान मोहन ने कहा कि गाड़ी वह ड्राइव कर रहा था जबकि कानपुर पुलिस ने अपनी जांच रिपोर्ट में शिवम मिश्रा को ही ड्राइवर बताया है.
बता दें, कि लेम्बोर्गिनी कार ने रविवार को 6 लोगों को कुचल दिया था. इसका वीडियो सामने आया था. पुलिस कमिश्नर ने जांच के हवाले से दावा किया था कि लेम्बोर्गिनी तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा का बेटा शिवम चला रहा था. शिवम मिश्रा का नाम भी FIR में जोड़ा गया था। केस की जांच कर रहे ग्वालटोली थाने के दरोगा दिनेश कुमार ने अपनी जांच रिपोर्ट में शिवम को आरोपी माना है. सारे सबूत कोर्ट में पेश किए.
















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