लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन बिल यानी 131वें संविधान संशोधन विधेयक पर दो दिनों तक लगातार चली चर्चा के बाद आज (शुक्रवार, 17 अप्रैल को) शाम हुई वोटिंग में ये बिल गिर गया है. यानी ये संविधान संशोधन बिल लोकसभा से पारित नहीं हो सका। कुल 298 सांसदों ने इस बिल के पक्ष में मतदान किया, जबकि 230 सांसदों ने इसके विरोध में मतदान किया. मतदान में कुल 528 सांसदों ने हिस्सा लिया. सांसदों के इस संख्या के हिसाब से बिल के पारित होने के लिए दो तिहाई यानी 352 वोटों की दरकार थी, जो नहीं मिल सका. बता दें कि लोकसभा में किसी भी संविधान संशोधन विधेयक को पारित करने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत होती है.
बिल के पक्ष में पड़े वोटों की बात करें तो सत्ता पक्ष के पास कुल 293 सांसदों का समर्थन हासिल था, जबकि उससे पांच वोट ज्यादा मिले लेकिन विपक्ष के बड़े दलों ने एकजुट होकर इस बिल के लिए जरूरी दो तिहाई संख्या बल जुटने नहीं दिया. इस तरह लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू करने से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक शुक्रवार को संसद के निचले सदन में पारित नहीं हो पाया. सरकार ने इस विधेयक के साथ ‘परिसीमन विधेयक, 2026’ और ‘संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026’ को भी सदन में चर्चा और पारित कराने के लिए रखा था, लेकिन उन्हें भी आगे नहीं बढ़ाया जा सका. संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने कहा कि संविधान संशोधन विधेयक के पारित नहीं होने के बाद अब इससे संबंधित दोनों विधेयकों ‘परिसीमन विधेयक, 2026’ और ‘संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026’ को आगे नहीं बढ़ा सकते.
गृह मंत्री अमित शाह ने यह बिल गिरने के लिए कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों को जिम्मेदार ठहराया है. अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि बिल गिर जाने पर जयनाद करना निंदनीय है. गौरतलब है कि यह बिल एक दिन पहले ही कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा में पेश किया था.
इस बिल पर लोकसभा में गुरुवार को 14 घंटे चर्चा चली थी. देर रात एक बजे के बाद लोकसभा की बैठक हुई और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष को क्रेडिट का ब्लैंक चेक देते हुए यह बिल पारित कराने में सहयोग की अपील की थी. पीएम मोदी ने वोटिंग से पहले एक्स पर पोस्ट कर सांसदों से अंतरात्मा की आवाज पर वोट करने की अपील की. यह अपील भी बेअसर साबित हुई.
इससे पहले, शुक्रवार को सुबह 11 बजे से लोकसभा में इस बिल पर चर्चा की शुरुआत हुई. शाम 6 बजे के बाद तक बिल पर चर्चा चली. गृह मंत्री अमित शाह ने इस बिल पर हुई चर्चा का जवाब दिया. अमित शाह की ओर से बिल पर चर्चा का जवाब दिए जाने के बाद कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने इसे विचार करने के लिए पेश कर दिया. वोटिंग में यह दो तिहाई बहुमत के आंकड़े तक नहीं पहुंच सका और गिर गया. बता दें कि विपक्ष के सांसदों ने परिसीमन को विरोध का आधार बनाया. विपक्षी दलों के सदस्यों ने चर्चा के दौरान भी कहा कि हम महिला आरक्षण के पक्ष में हैं, लेकिन परिसीमन के विरोध में हैं.
बता दें कि बजट सत्र 2 अप्रैल को समाप्त होना था. बजट सत्र के अंतिम दिन सरकार की ओर से लोकसभा स्पीकर ओम बिरला और राज्यसभा सभापति सीपी राधाकृष्णन से लिखित अनुरोध किया था कि अनिश्चित काल के लिए कार्यवाही स्थगित नहीं कर 16 से 18 अप्रैल तक सदन की बैठक बुलाएं. विपक्षी दल पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्यों में चुनाव संपन्न होने के बाद सर्वदलीय बैठक बुलाने और फिर किसी भी दिन संसद की बैठक बुलाने की अपील की थी. सरकार ने विपक्ष का यह अनुरोध ठुकरा दिया था.
















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